Motivational Stories

आप हाथी नहीं इंसान हैं !

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एक आदमी कहीं से गुजर रहा था, तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा, और अचानक रुक गया. उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई है, उसे इस  बात का बड़ा अचरज हुआ कि हाथी जैसे विशालकाय जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हैं!!! ये स्पष्ट था कि हाथी जब चाहते तब अपने बंधन तोड़ कर कहीं भी जा सकते थे, पर किसी वजह से वो ऐसा नहीं कर रहे थे. उसने पास खड़े महावत से पूछा कि भला ये हाथी किस प्रकार इतनी शांति से खड़े हैं और भागने का प्रयास नही कर रहे हैं ? तब महावत ने कहा, ” इन हाथियों को छोटे से ही इन रस्सियों से बाँधा जाता है, उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती कि इस बंधन को तोड़ सकें. बार-बार प्रयास करने पर भी रस्सी ना तोड़ पाने के कारण उन्हें धीरे-धीरे यकीन होता जाता है कि वो इन रस्सियों नहीं तोड़ सकते, और बड़े होने पर भी उनका ये यकीन बना रहता है, इसलिए वो कभी इसे तोड़ने का प्रयास ही नहीं करते.” आदमी आश्चर्य में पड़ गया कि ये ताकतवर जानवर सिर्फ इसलिए अपना बंधन नहीं तोड़ सकते क्योंकि वो… Read More »

भिखारी जैसी सोच, कभी राजा नहीं बनाने देती

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एक राजा का जन्मदिन था, जब वह सुबह घुमने निकला तो उसने तय किया की आज मुझे जो भी पहला व्यक्ति मिलेगा मैं उसे पूरी तरह खुश और संतुष्ट करेगा, रास्ते में उसे एक भिखारी मिला , उस भिखारी ने उस  राजा  से भीख मांगी तो राजा ने उसे एक तांबे का सिक्का निकल कर  उसकी और फेका लेकिन वो सिक्का उसके हाथ से छुट कर नाली में जा गिरा , भिखारी उस सिक्के को नाली में हाथ डाल  कर  खोजने लगा , राजा ने यह   देख उसे बुलाकर  दूसरा तांबे का सिक्का दिया ,भिखारी ने वह सिक्का लेकर आपनी जेब में रख लिया और फिर जा कर उसी नाली में पहले वाला सिक्का खोजने लगा।  यह देख कर राजा  को लगा की भिखारी बहुत गरीब है , उसने अपनी जेब  से चांदी  का सिक्का  निकला और भिखारी को दे दिया ,भिखारी राजा की जय जयकार करते हुवे फिर से नाली में वही सिक्का खोजने लगा ,फिर से  राजा  ने अपने  जेब में हाथ डाला और एक सोने का सिक्का निकल कर  उस भिखारी को दिया ,भिखारी ख़ुशी से झूम उठा और वापस भाग कर उसी नाली में वही सिक्का खोजने लगा , यह देख  राजा को बड़ा बुरा लगा और तभी उसे अपनी… Read More »

आज का काम, कभी भी कल पर ना टाले

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एक बार की बात है कि एक शिष्य अपने गुरु का बहुत आदर-सम्मान किया करता था |गुरु भी अपने इस शिष्य से बहुत स्नेह करते थे लेकिन वह शिष्य अपने अध्ययन के प्रति आलसी और स्वभाव से दीर्घसूत्री था |सदा स्वाध्याय से दूर भागने की कोशिश करता तथा आज के काम को कल के लिए छोड़ दिया करता था | अब गुरूजी कुछ चिंतित रहने लगे कि कहीं उनका यह शिष्य जीवन-संग्राम में पराजित न हो जाये|आलस्य में व्यक्ति को अकर्मण्य बनाने की पूरी सामर्थ्य होती है |ऐसा व्यक्ति बिना परिश्रम के ही फलोपभोग की कामना करता है| वह शीघ्र निर्णय नहीं ले सकता और यदि ले भी लेता है,तो उसे कार्यान्वित नहीं कर पाता| यहाँ तक कि अपने पर्यावरण के प्रति भी सजग नहीं रहता है और न भाग्य द्वारा प्रदत्त सुअवसरों का लाभ उठाने की कला में ही प्रवीण हो पता है | उन्होंने मन ही मन अपने शिष्य के कल्याण के लिए एक योजना बना ली |एक दिन एक काले पत्थर का एक टुकड़ा उसके हाथ में देते हुए गुरु जी ने कहा –‘मैं तुम्हें यह जादुई पत्थर का टुकड़ा, दो दिन के लिए दे कर, कहीं दूसरे गाँव जा रहा हूँ| जिस भी लोहे की वस्तु को तुम इससे स्पर्श करोगे,… Read More »

इस गधे से कौन बहस करे

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एक दिन एक बूढ़ा किसान अपने गधे पर सवार होकर आपने खेत से घर की और जा रहा था, तभी कुछ गाँव वाले उसको रास्ते में मिले ,उन्होंने उस बूढ़े किसान से पूछा की बाबा कहा जा रहे हो बूढ़ा किसान बोला – घर जा रहा हूँ , तो गाँव वाले सोचने लगे और कहा की बाबा पर आप का घर तो उधर है दूसरी दिशा में , तो उस बूढ़े किसान ने जवाब दिया की मैं जनता हूँ की मेरा घर उस दिशा में है पर इस गधे से कौन बहस करे सन्देश– हममे से ज्यादातर लोग इसी तरह सोचते है की जिंदगी जहा भी ले जाये वह जाना पड़ेगा , फिर चाहे हमारे हालत कितने भी ख़राब क्यों न हो गए ,उन्हें  हालातो से समझोता कर लेना ज्यादा आसान लगता है बजाय उनसे लड़ने के   

मुफ्त अनार की कीमत कोई नहीं समझता

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एक समय की बात है।  एक शहर में एक धनी आदमी रहता था।   उसकी लंबी-चौड़ी खेती-बाड़ी थी और वह कई तरह के व्यापार करता था। बड़े विशाल क्षेत्र में उसके बगीचे फैले हुए थे, जहां पर भांति-भांति के फल लगते थे। उसके कई बगीचों में अनार के पेड़ बहुतायत में थे, जो दक्ष मालियों की देख-रेख में दिन दूनी और रात चौगुनी गति से फल-फूल रहे थे। उस व्यक्ति के पास अपार संपदा थी , किंतु उसका हृदय संकुचित न होकर अति विशाल था। शिशिर ऋतु आते ही वह अनारों को चांदी के थालों में सजाकर अपने द्वार पर रख दिया करता था।  उन थालों पर लिखा होता था ‘आप कम से कम एक तो ले ही लें। मैं आपका स्वागत करता हूं।’   लोग इधर-उधर से देखते हुए निकलते,  किंतु कोई भी व्यक्ति फल को हाथ तक नहीं लगाता था ।  तब उस आदमी ने गंभीरतापूर्वक इस पर विचार किया और किसी निष्कर्ष पर पहुंचा ।  अगली शिशिर ऋतु में उसने अपने घर के द्वार पर उन चांदी के थालों में एक भी अनार नहीं रखा, बल्कि उन थालों पर उसने बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा  ‘हमारे पास अन्य सभी स्थानों से कहीं अच्छे अनार मिलेंगे,  किंतु उनका मूल्य भी दूसरे के अनारों की… Read More »

हीरे की असली कीमत एक जौहरी ही लगा सकता है

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एक हीरा व्यापारी था जो हीरे का बहुत बड़ा विशेषज्ञ माना जाता था, किन्तु गंभीर बीमारी के चलते अल्प आयु में ही उसकी मृत्यु हो गयी . अपने पीछे वह अपनी पत्नी और बेटा छोड़ गया . जब बेटा बड़ा हुआ तो उसकी माँ ने कहा -“बेटा , मरने से पहले तुम्हारे पिताजी ये  पत्थर छोड़ गए थे , तुम इसे लेकर बाज़ार जाओ और इसकी कीमत का पता लगा, ध्यान रहे कि तुम्हे केवल कीमत पता करनी है , इसे बेचना नहीं है.”युवक पत्थर लेकर निकला, सबसे पहले उसे एक सब्जी बेचने वाली महिला मिली. ” अम्मा, तुम इस  पत्थर के बदले मुझे क्या दे सकती हो ?” , युवक ने पूछा.” देना ही है तो दो गाजरों के बदले मुझे ये दे दो…तौलने के काम आएगा.”- सब्जी वाली बोली.युवक आगे बढ़ गया. इस बार वो एक दुकानदार के पास गया और उससे पत्थर की कीमत जानना चाही .दुकानदार बोला ,” इसके बदले मैं अधिक से अधिक 500 रूपये दे सकता हूँ..देना हो तो दो नहीं तो आगे बढ़ जाओ.”युवक इस बार एक सुनार के पास गया , सुनार ने पत्थर के बदले 20 हज़ार देने की बात की, फिर वह हीरे की एक प्रतिष्ठित दुकान पर गया वहां उसे पत्थर के बदले 1… Read More »