समय का प्रबंधन कैसे करे

time-managment

यदि आप जिंदगी में तरक्की करना चाहते हो तो अपने समय का प्रबंधन करना सीखे , समय का प्रबंधन एक सरल तंत्र है , जिसका उपयोग करके आप अपनी टालमटोल की आदत से उबार सकते हो। परन्तु इसके लिए आत्म-अनुशासन और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है , लेकिन इसको जीवन में उतार लेने के पुरस्कार भी बहुत बड़े मिलते है। इस तंत्र का उपयाग करने से आपकी उत्पादकता ,प्रदर्शन , परिणाम और आमदनी को दो-तीन गुना बढ़ा सकते हो।
दिन की शुरुआत करने से पहले उस दिन करने वाले कार्यो की सूची बना ले। सूचि बनाने का सबसे अच्छा समय एक दिन पहले रात को होता है , ताकि आपका अवचेतन मन आपके सोते समय भी इस गतिविधि – सूचि पर काम कर सके। क्योकि इसी वजह से सुबह जागने के बाद ऐसे नए विचार आपके मन में आते है ,जिनसे आप दिन के कामो को ज्यादा कारगर तरीको से पूरा कर सकते हो।
अपनी सूचि में ए , बी , सी , डी, ई विधि का उपयोग करे –
= ”करना ही होगा ” – न करने के गंभीर परिणाम ;
बी= ”करना चाहिए” – करने या न करने के परणाम ;
सी= “करना अच्छा है ” -चाहे आप उसे करे या न करे , कोई परिणाम नहीं होता ;
डी = “सौपे ” – जो काम आप दुसरो को सौप सकते है ,क्योकि आप किसी को काम सौप कर ,आप अपने लिए समय खाली करते है उन कामो के लिए जिन्हें सिर्फ आप हे कर सकते हो
=  ” छोड़े ” – वे सरे काम और गतिविधिया छोड़ दे , जो आपके उद्देश्य और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अनिवार्य नहीं है
यदि आपके पास ”ए ” श्रेणी के कई कार्य है तो उन्हें उनके महत्व के क्रम से जमा ले। जैसे – ए-1,ए-2 ,ए-3…। ” बी ” और “सी ” के कार्यो के साथ भी ऐसा ही करे।
अगर आप यह तंत्र उपयोग करते है तो इसका सबसे बड़ा नियम यह है की जब तक आपका “ए ” कार्य अधुरा है ,तब तक आपको “बी” कार्य नहीं करना चाहिए। याद रखो की जब तक आपके पास अधिक महत्वपूर्ण कार्य हो ,तब तक कम महत्व वाले कार्यो को करना समय का नुकसान और अपनी तरक्की का नुकसान करना होता है।
ये करना आसान है परन्तु जब तक इसकी आदत नहीं बनेगी आपको सफलता और अच्छे परिणाम मिलना संभव नहीं है।