सफलता पाने का मुश्किल, पर आसान तरीका -Motivational stories and inspirational stories in hindi

जब मेरे पास कोई रास्त नहीं था और न ही कोई काम समझ में आता था कि ऐसा क्या किया जाए जो मुझे सफलता दिला दे। और इसी चक्कर में, मैं अक्सर लोगो पर भरोसा कर लेता था परन्तु  मुझे हमेशा धोखा ही मिलता शायद आपके साथ भी ऐसा ही होता होगा ? अगर हां तो आइए इन चीज़ो से मैं कैसे बहार निकला और जिंदगी में मैंने सफलता पाने के लिए क्या किया , ये आपको बताता हूँ।
1- आप उस काम को अपना व्यवसाय बनाए जो आपको करने में मजा आता हो और जिसमे आप मास्टर हो – अक्सर मैंने देखा है कि लोग मज़बूरी में कोई भी नौकरी या कोई भी काम स्टार्ट कर देते है उनसे कभी पूछो कि ये काम क्यों स्टार्ट किया या इसको ही अपना व्यवसाय क्यों बनाया तो ज्यादातर लोगो का यही जवाब होता है कि यार इस पापी पेट के लिए कुछ तो करना पड़ेगा। तब मन में एक ही ख्याल आता है कि क्या जानवरो का पेट नहीं होता है ! अरे भाई इसलिए मत जियो कि पैदा हो गए तो बस जिंदगी गुजारना   है बल्कि ऐसे जियो की लोग कहे कि काश मैं उसके घर पैदा होता। आप ही सोचो की आज अम्बानी के यहाँ कौन पैदा होना नहीं चाहेगा ? याद रखो कि आदमी काम को मज़बूरी में तब करता है जब उसको मजा नहीं आता या उसके पसंद का न हो।

2- भरोसा सिर्फ अपने आप पर ही करो – मैं ये नहीं कह रहा की दुनिया भरोसे के लायक नहीं पर हम जब किसी पर भरोसा करने लगते है तो हम साथ ही साथ उस व्यक्ति पर निर्भर भी हो जाते है और एक वक़्त ऐसा आता है जब हम उसके बगैर और वो हमारे बगैर कुछ भी नहीं कर पता , अब अगर ऐसी स्थिति में कोई मन मुटाव हो जाता है। क्योकि हम इंसान है गलतिया होती है फिर वो चाहे आपकी हो या उसकी। बस तो आपकी अब तक की सारी की सारी मेहनत पानी में , ऐसी स्थिति में आप २-३ साल कड़ी मेहनत करने के बाद भी आप  उसी जगह पहुच जाते हो जहा से आपने चलना शुरू किया था ..याद रखो कि वही व्यक्ति तेज चलता है जो अकेला चलता है।

3-एक लक्ष्य बनाए – मेरा मानना है कि कोई भी वयक्ति बिना लक्ष्य के कभी भी मंज़िल तक नहीं पहुच सकता। उसी तरह जिस तरह आप किसी ख़त पर पता न लिखो और उसको पोस्ट कर दो… आपको लगता है वो ख़त कही पहुच पाएगा ? मैं ये नहीं मानता कि आपके पास लक्ष्य नहीं है परन्तु कृपा कर अपने लक्ष्य कि एक  बार फिर से जाच कर ले कि कही वो आपकी ख्वाइशे तो नहीं है? याद रखो कि लक्ष्य हमेशा बड़ा , बहुत बड़ा होना चाहिए और फिर उस  लक्ष्य को तीन भागो में बाट ले लॉन्ग टर्म , मिडल टर्म और शॉर्ट टर्म में।  मैं जनता हूँ कि लक्ष्य बनाने के बाद आप उसके लिए पहले भी काम कर चुके है क्योकि मैं कोई दुनिया का पहले आदमी तो हूँ नहीं जो आपको नई बात बता रहा हूँ।  मैं ये भी जानता हूँ कि आपके साथ क्या हुआ होगा या क्या होगा लक्ष्य बनाने के बाद।  दोस्तों वक़्त कि मार ही कुछ ऐसी होती है कि मार खाते खाते हम अपनी मंज़िल का पता ही भूल जाते है कि जाना कहा था और फिर ऐसे में हम किसी भी ऐसी गाड़ी में सवार हो जाते है। जो हमे कभी भी मंज़िल तक नहीं पंहुचा सकती और यह एहसास भी हमे तब होता है ,जब हम कुछ दूर उस गाड़ी में सफ़र कर चुके होते है।  ऐसी स्थिति में कुछ लोग तो उस गाड़ी से उतर कर दूसरी गाड़ी , दूसरी से तीसरी , तीसरी से चौथी और पूरी जिंदगी ही  सफ़र करते रहते है और कभी अपनी मंज़िल पर नहीं पहुच पाते। लेकिन कुछ लोग पहली गाड़ी से ही नहीं उतरते उसी को अपनी किस्मत मान कर सफ़र करते रहते है और वो भी कभी अपनी मंज़िल तक नहीं पहुच पाते। याद रखो आप मज़िल तक तभी पहुच पाओगे जब कि आप अपने लक्ष्य को छोड़ोगे नहीं चाहे हालत कुछ भी हो, लोग कुछ भी कहे बस एक बार जो सोच लिया उसको किसी भी हाल में और किसी भी काल में पूरा करना है।

4-अपने लक्ष्य को हर जगह लिख कर चिपका दे –ताकि आपको हर पल ,हर वक़्त ये ध्यान रहे कि मुझे  जाना कहा है।  ऐसा इसलिए भी करना जरुरी है क्योकि हम इंसान है और हमे भगवान  ने  एक ऐसा मस्तिष्क दिया है जिसे अगर रोज  याद न दिलाओ तो वो भूल जाता है और मैं नहीं चाहता कि आप आज के बाद कुछ भी भूल पाए।

5- अपने लक्ष्य के बारे में सभी को बताए –ऐसा इसलिए करना है कि हो सकता है आप अपने लक्ष्य को भूल जाए लेकिन अगर आपने लोगो को बता दिया कि आपके पास एक साल बाद कार होगी तो फिर  वो आपको नहीं भूलने देंगे हर रोज जब भी आप उनको दिखाई  देंगे वो आपसे यही पूछेंगे कि कार आ गई कि नहीं ?कार के टुकड़े कर कर के पूछँगे कि टायर तो ले आया होगा , या स्टेयरिंग तो आ गया होगा।  मैं मानता हूँ कि दुनिया बड़ी जालिम है वो आपके जले  पर नमक छिड़कती है । पर हम चाहे तो उन्हें रिमाइंडर या अलार्म घड़ी  की तरह उपयोग में ला सकते जो हमे हर पल याद दिलाते रहे कि जाना कहा है।

 6- शरुआत हमेशा छोटे से करे – आपका लक्ष्य चाहे बड़ा हो परन्तु उसकी शुरुआत छोटे से ही करे क्योकि छोटे काम और लक्ष्य को आप आसानी से प्राप्त कर सकते हो। मेरा मानना है कि अगर कोई भी व्यक्ति चाहे कि मैं एक दिन  में ही पहलवान  बन जाऊं  तो वह  नहीं बन सकता क्योकि वो चाहे भी तो 200 किलो वजन पहले ही दिन नहीं उठा सकता फिर चाहे उसका जोश, जूनून या जज्बा कितना भी हो। सोचो कि वो ऐसे में जिद्द पकड़  ले कि नहीं मुझे तो 200 किलो  पहले दिन ही उठाना है तो उसका क्या होगा ? सच  लेकिन हक़ीक़त यही है उसका पहलवान बनने  का भुत पहले दिन ही उतर जाएगा। याद रहे कि आपका जज्बा और  आपकी जिद्द ही आपको खेल से बहार कर सकती  है। और अगर आप खेल में बने  रहना चाहते  है तो समझदारी  इसी में है कि आप पहले 10 किलो के वजन से शुरुआत करे, फिर 30 किलो, फिर 50, फिर 100 और फिर 150  किलो और फिर एक दिन ऐसा आएगा  कि  200 किलो भी आसानी से उठा लोगे याद रहे कि  जब आप एक सफलता पा लेते हो तो आपको एक अलग ही ख़ुशी  का एहसास होता है और इसी ख़ुशी के सहारे आपको अपने अगले और थोड़े बड़े  लक्ष्य के लिए ताकत  मिल जाती है  और इसी आप सफलता हासिल करते चले जाओगे। और आपने ऐसा नहीं किया और कोई बड़े से शुरुआत कर दी, और कही उसमे असफल हो गए तो समझो  की आपके सपनो का अंत वही हो गया

7-लक्ष्य के साथ लगे रहो  – लगे रहो मुन्ना  भाई लगन से कामियाबी  मिलेगी  कसम से। दोस्तों किसी भी हाल में अपने लक्ष्य हासिल करे बगैर आपको पीछे  नहीं हटना  है क्योकि अगर एक बार असफल हो गए तो समझो खेल ख़त्म। क्योकि एक असफलता आपको वैसे  ही खाली कर देती है जैसे  कि कोई पानी के टैंक एक छेद ,पानी के टैंक को खाली कर देता  है।