सफलता कैसे प्राप्त की जाती है ?

एक व्यक्ति जानना चाहता था कि आखिर सफलता कैसे प्राप्त की जाती  है। उसने जानने की हर एक कोशिश की।  एक दिन उसे पता चला की उसके गाँव में  एक  विद्वान  ऋषि आये हुए है।  उसने सोचा की क्यों न, उन्ही से मिलकर ये जानने की कौशिश करू, शायद मेरे सवाल का जवाब वो दे पाए। वह उस ऋषि के पास गया।  और उनसे कहा” आप इतने महान है”,तो  क्या मेरे एक सवाल का जवाब मुझे बता पाएंगे ?  ऋषि ने कहा कोशिश करूँगा।  उसने अपना सवाल पूछा  कि ” सफलता कैसे प्राप्त की जाती है”?
ऋषि मुस्कुराए   और कहा की आज नहीं, मैं कल तुम्हारे सवाल का जवाब दूंगा।  कल  सुबह  तुम,   तुम्हारे गाँव की नदी के किनारे मिलना वही बताऊंगा।
अगले दिन वह युवक नदी किनारे पहुंचा। ऋषि वह उसके सवाल का जवाब देने वही खड़े थे।
युवक ने जब वही सवाल उनसे किया तो ऋषि ने उससे कहा कि नदी के अंदर चलो।  युवक सोच में पड़ गया ! तभी ऋषि ने कहा कि तुम्हे जानना नहीं है की सफलता कैसे प्राप्त की जाती है? युवक तैयार हो गया और नदी के अंदर उतर गया।
ऋषि ने कहा -थोड़ा और आगे ,” अब कमर कमर तक पानी में दोनों खड़े थे। ”
युवक बोला – अब बताओ ?
ऋषि ने कहा – थोड़ा और आगे चलो।  ” अब गले तक पानी में दोनों खड़े थे ”
फिर युवक ने कहा – अब तो बताओ ?
ऋषि ने उसके बाल पकडे और उसे पूरी ताकत से पानी में डुबो दिया।  युवक पानी के अंदर तड़पने और झटपटाने लगा। लेकिन ऋषि ने उसे नहीं छोड़ा , वह युवक पानी के अंदर तड़पता रहा।
कुछ समय बाद जब उसकी साँस फूलने लगी तब ऋषि ने उसको छोड़ दिया। जैसे ही वह युवक छूटा तो ग़ुस्से से लाल पिला होने लगा और ऋषि पर घुस्सा करने लगा की क्या मुझे मारना  चाहते थे।
ऋषि ने प्रेम पूर्वक उससे पूछा -क्या तुम नहीं जानना चाहते की सफलता कैसे प्राप्त की जाती है ?
तभी युवक थोड़ा शांत हुआ और सर हिला कर हां कहा।
ऋषि ने उस युवक से पूंछा की अच्छा ये बताओ की जब तुम पानी में अंदर थे तब तुम्हे किस चीज़ की इच्छा सबसे ज्यादा कर रही थी।
युवक ने थोड़ा सोचा और जवाब दिया ” साँस की”। मुझे  बस ऐसा लगा की साँस के बगैर में मर ही जाऊंगा।  बस  ऐसी इच्छा कर रही थी की कैसे  भी ,  मुझे साँस लेने को मिल जाए।
ऋषि – बस यही बताना चाहता था की अगर वाकई जितनी इच्छा तुम्हारी साँस लेने की कर रही थी। उतनी ही इच्छा सफलता पाने की होगी तभी सफलता मिलेगी। यही है” सफ़लता प्राप्त करने का मूल मंत्र”।
और ऋषि वहा से चले गए।
दोस्तों हम हमारे कार्य में सफल तो पाना चाहते  है लेकिन  क्या हम उसे पाने के लिए इतनी इच्छा रखते है।  सच है अगर मरते वक़्त इंसान को जितने साँस लेने की इच्छा करती है अगर उतनी ही इच्छा से हम सफलता पाने की सोचे तो कभी असफल नहीं होंगे। वाकई इच्छाशक्ति में बड़ी ताकत होती है एक बार आजमा कर तो देखिए।