सकारात्मक तस्वीर बनाए

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मेरा मानना है की जो व्यक्ति खुद मानसिक कल्पना करते समय असफल होने की बजाय सफल होने की तस्वीर देखता है , वह अपने लक्ष्य को आसानी से पा लेता है। और उससे भी महत्वपूर्ण बात यह है की वह व्यक्ति उस काम में सफलता पाने के लिए हर कीमत को चुकाने का इच्छुक रहता है। मानसिक तस्वीर बहुत ही महत्वपूर्ण होती है, क्योकि हमारे भविष्य का हमारी आत्म-छवि से गहरा संबंध होता है। हम अपने बारे में जो भी सोचते है ,जो भी तस्वीर देखते है और जो भी कल्पना करते है , काफी हद तक हम भविष्य में वैसे ही बन जाते है। इस बात को मैंने बड़ी ही गहराई से समझा है शायद आप को भी समझ आ जाये। मैंने एक कहानी पड़ी थी जिसने मुझे यह समझाया की काम की सफलता ९९ प्रतिशत, उसकी आत्म-छवि और कल्पना पर निर्भर करती है।
एक मशहूर जिमनास्ट के कई युवा स्टूडेंट थे , जिनमे स्टार बन्ने की महत्वकांक्षा  थी। एक दिन सभी स्टूडेंट ने कम खतरनाक करतब आराम से कर दिए। फिर ऊची छड़ पर चलने की बरी आई। एक को छोड़ कर बाकि सुभी ने ये काम संतोषजनक तरीके से कर लिया। लेकिन छड़ की तरफ देखते ही आखरी उम्मीदवार के मन में नकारात्मक आत्म -छवि हावी हो गई। उसने सबसे बुरे परिणाम की कल्पना की – जरा सी गलती होने पर वह ज़मीन पर गिर पड़ेगा। बस फिर क्या था वह बर्फ की तरह जम गया और एक भी मांसपेशी नहीं हिल सकता था। उसकी कल्पना उसे उसके ज्ञान पर अमल करने से रोक रही थी। दहशत में आकर बोलने लगा की “मैं नहीं कर सकता।मैन यह काम नहीं कर सकता।क्योकि मैं खुद को गिरते हुए देख रहा हूँ। मैं यह काम हर्गिज नहीं कर सकता ”
उसको सिखाने वाले गुरु ने कहा – की देखो यदि तुम यह नहीं कर सकते होते तो मैं तुमको बिलकुल भी ये करने को नहीं कहता। देखो, मैं तुम्हे बताता हूँ कि इसे कैसे करना है। सबसे पहले अपने दिल को उस छड़ के ऊपर फेको। फिर तुम्हारा शरीर अपने आप उसका अनुसरण करेगा ” जाहिर है ,इसका मतलब यह है की” अपनी आस्था ,आत्मविश्वास की छवि को मुस्किल के ऊपर फेकना”- इसके बाद भौतिक हिस्सा अपने आप अनुसरण कर लेगा। इतना सुनते ही लड़के के बंद सोच के दरवाजे खुल गए। मानसिक छवि बदल गई और आखिरकार उसने बिना किसी दुर्घटना के यह काम कर लिया।
हर व्यक्ति के जीवन में संकट आते है। और बुरे से बुरे की उम्मीद कर के हम बर्फ की तरह जम जाते है और ठीक से काम नहीं कर पाते है। लेकिन हम कल्पना की शक्ति को बदल दे और तस्वीर बनाए और उसे अपने आने वाली मुश्किलों  और बाधाओ पर उछाल दे तो हम जरुर पार पा लेंगे। याद रखो दोस्तों की कार्य का परिणाम हमेशा आपके मस्तिष्क की सोच का अनुसरण करता है।
हम लोग भी बहुत सारी चीजों से बर्फ बन जाते है। अगर एकाध बड़ी गलती कर देते है , एकाध मूर्खतापूर्ण काम कर देते है ,तो इससे हमारा आत्मविश्वास डगमगा जाता है और परिणाम स्वरूप हम अपने मस्तिस्क में गलत तस्वीर बनाना सुरु कर देते है। और फिर हमारे साथ सब गलत होने लगता है क्योकि तस्वीर ही गलत बनाई है हमने ,तो याद रखो की मस्तिष्क  मैं आप जैसी तस्वीर बनाओगे  आप वैसे ही  बनोगे।