संगठन की ताकत -Motivational stories and inspirational stories in hindi

इंसान इस बात को आज से नहीं कई सदियों से सुनता चला आ रहा है कि संघठन में बड़ी शक्ति होती है। लेकिन फिर भी आज अकेला है शायद हम इंसानो में एक कंप्यूटर वाइरस कि तरह ही एक वाइरस विद्यमान है जिसे घमंड कह सकते है शायद यही हम लोगो को एक होकर काम नहीं करने देता है और न एक साथ रहने देता है। इसीलिए परिवार छोटे होते चले जा रहे है और कंपनिया बंद होती जा रही है याद रखो जिस परिवार या कंपनी में संघठन नहीं है उस परिवार और उस कंपनी का वजूद ही नहीं रहता।  जब एक व्यक्ति के अंदर ये घमंड आ जाता है कि मैं दुसरो से ज्यादा महत्व रखता हूँ।  तभी से लोगो के दिलो में , घरो में और कम्पनियो में फर्क दिखने लगता है।  दुनिया में हर इंसान, जानवर या कोई भी वस्तु , अपना एक महत्त्व रखती है। जब एक इंसान , दूसरे इंसान के इस महत्व को नजरअंदाज करता है तभी से संगठन का पतन होने लगता है। आइए इसे एक कहानी के माध्यम से समझते है।
एक बार हाथ की पाँचों उंगलियों में आपस में झगड़ा हो गया| वे पाँचों खुद को एक दूसरे से बड़ा सिद्ध करने की कोशिश में लगे थे | अंगूठा बोला की मैं सबसे बड़ा हूँ, उसके पास वाली उंगली बोली मैं सबसे बड़ी हूँ इसी तरह सारे खुद को बड़ा सिद्ध करने में लगे थे जब निर्णय नहीं हो पाया तो वे सब अदालत में गये |न्यायाधीश ने सारा माजरा सुना और उन पाँचों से बोला की आप लोग सिद्ध करो की कैसे तुम सबसे बड़े हो? अंगूठा बोला मैं सबसे ज़्यादा पढ़ा लिखा हूँ क्यूंकी लोग मुझे हस्ताक्षर के स्थान पर प्रयोग करते हैं| पास वाली उंगली बोली की लोग मुझे किसी इंसान की पहचान के तौर पर इस्तेमाल करते हैं| उसके पास वाली उंगली ने कहा की आप लोगों ने मुझे नापा नहीं अन्यथा मैं ही सबसे बड़ी हूँ | उसके पास वाली उंगली बोली मैं सबसे ज़्यादा अमीर हूँ क्यूंकी लोग हीरे और जवाहरात और अंगूठी मुझी में पहनते हैं| इसी तरह सभी ने अपनी अलग अलग प्रशन्शा की |न्यायाधीश ने अब एक रसगुल्ला माँगाया और अंगूठे से कहा की इसे उठाओ, उंगुठे ने भरपूर ज़ोर लगाया लेकिन रसगुल्ले को नहीं उठा सका | इसके बाद सारी उंगलियों ने एक एक करके कोशिश की लेकिन सभी विफल रहे| अंत में न्यायाधीश ने सबको मिलकर रसगुल्ला उठाने का आदेश दिया तो झट से सबने मिलकर रसगुल्ला उठा दिया | फ़ैसला हो चुका था, न्यायाधीश ने फ़ैसला सुनाया कि तुम सभी एक दूसरे के बिना अधूरे हो और अकेले रहकर तुम्हारी शक्ति का कोई अस्तित्व नहीं है, जबकि संगठित रहकर तुम कठिन से कठिन काम आसानी से कर सकते हो|
शायद किसी ने सच ही कहा है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता