ये बाते आपको सफल होने से रोकती है…

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कुछ लोग अपनी जिंदगी में आगे शायद इसलिए नहीं बढ़ पाते क्यों की वह पीड़ित बनकर ही रहना चाहते है ।इन लोगो का सबसे बड़ा और पसंदीदा विचार है – मैं बेचारा, और ये बेचारे ही बने रहते है। ये लोग बहुत बड़े पीड़ित होते है ,ये हमेशा पीड़ित की भूमिका इसलिए निभाते है की उन्हें लगता है ऐसा करने से उनको कुछ ना कुछ मिलता रहेगा। पीड़ित की भूमिका निभाने वालो को कैसे पहचाना जाए की वह पीड़ित है या नहीं ?
इनकी पहचान बड़ी ही आसानी से की जा सकती है -इनके संकेत बड़े ही स्पष्ट होते है
संकेत न. १- दोष देना –
ये इस खेल के माहिर खिलाड़ी होते है और इनके इस खेल का उद्देश्य यही होता है की आप कितने ज्यादा लोगो को दोषी ठहरा सकते है, दिलचस्प बात ये है की ये लोग अपनी तरफ तो देखते तक नहीं , इनसे हमेशा दूर रहना चाहिए वर्ना ये लोग आप को भी पीड़ित कर सकते है। पीड़ित व्यक्ति अर्थव्यवस्था को, सरकार को, शेयर बाज़ार को, ब्रोकर को ,बिज़नेस के तरीको को ,मालिक को ,नोकर को ,मेनेजर को ,जीवनसाथी को ,बच्चो को ,दोस्तों को ,माता – पिता को , किसी न किसी को दोष देते ही रहते है, हमेशा उनकी नकामियाबी में दुसरो का ही हाथ रहता है ऐसा ये मानते है और उन्हें दोष देने के लिए ही बेठे रहते है ,ये अपनी नकामियाबी का घड़ा लेकर घूमते है और तलाश करते है की किसके सर पर फोड़ू जैसे – की बच्चा परीक्षा में फ़ैल हो गया तो आदमी , अपनी पत्नी से कहता है की कैसी नालायक औलाद पैदा की है और अगर अच्छे नंबर लाया तो कहता है की देखा – आखिर बेटा किसका है। ये हमेशा दोष देते ही  दिखाई देते है की उसने ऐसा किया वर्ना मैं ऐसा कर जाता ,वो अगर नहीं होता तो , जिस प्रकार जिंदगी में सफलता हासिल करने वाला यह कहता है की मेरी सफलता के पीछे उसका हाथ है। बस ये भी उसी तरह कहते है की मेरी नकामियाबी के पीछे उसका हाथ है।

संकेत न. २ – खुद को सही ठहराना –
अगर पीड़ित व्यक्ति  किसी दुसरो पर दोष नहीं मढ़ रहे है तो अक्सर आप पाएंगे की वे अपनी स्थिति में खुद को सही ठहरा रहे है या तर्क दे रहे है और इस तरह की बात करते  है उदाहरण  के लिए  – ” पैसा सचमुच महत्वपूर्ण नहीं है ” या ” पैसा महत्वपूर्ण तो है पर प्यार जितना नहीं ”
आप ही बताओ की अगर कोई ये कहता है की आपका पति ,आपकी पत्नी, गर्लफ्रेंड, बच्चे ,पार्टनर ,आपका दोस्त आपके लिए महत्वपूर्ण नहीं है तो क्या वह व्यक्ति आपके पास ज्यादा समय तक रहेगा? मुझे तो नहीं लगता , जो व्यक्ति यह कहता है की पैसा उसके लिए महत्वपूर्ण नहीं है उसके पास ये ज्यादा देर तक रहता भी नहीं है ,मुझे अगर कोई ऐसा कहता है की पैसा उसके लिए महत्वपूर्ण नहीं है या उसकी दिलचस्पी पैसे में नहीं है ,तो मैं तुरंत समझ जाता हूँ की इससे बड़ा कड़का आदमी दुनिया में नहीं है और जिंदगी भर ये कड़का ही   रहेगा , जाहिर है की जिस चीज़ को आप महत्वपूर्ण नहीं मानते | वह आपके पास रह ही नहीं सकती , आप मोटर सायकल को महत्वपूर्ण नहीं मानते ,कार को ,घर को, तो क्या आपके पास ये रहेगी या होगी ?
अब आपसे कोई कहे की पैसा उसके लिए महत्वपूर्ण नहीं है तो अपने सर पर हाथ रखना, उपर आसमान में देखना और कहना की तुम कड़के हो ! ताकि उसे ऐसा लगे की उपर वाले ने वाकई उसकी सारी हकीकत आपको बता दी। वो सदमे में आपसे पूछेगा की आपको कैसे पता ? उसका हाथ लेना और कहना की कुछ और जानना चाहते हो तो ५० रुपये लगेंगे  ।
पीड़ित अगर यह कहते नहीं पाया गया तो वह तर्क देगा की हां मानता हूँ की पैसा महत्वपूर्ण है पर प्यार जितना नहीं – क्या आपकी राय में यह तुलना मूर्खतापूर्ण है या नहीं की ज्यादा महत्वपूर्ण क्या है ? आपके हाथ या पैर या दोनों।
मैं और आप जानते है की पैसा उस जगह पर बहुत महत्वपूर्ण है जिनमे वह काम करता है और उस जगह बिलकुल महत्वहीन है जहा वह काम नहीं करता , खैर आज की दुनिया में तो हर काम पैसे से ही होता है। हालाकि हो सकता है की प्रेम से दुनिया चलती हो,….पर पेट नहीं भरता ,अस्पताल ,बच्चो की फ़ीस या मकान नहीं खरीद सकते। और यकीं नहीं आता तो आप खुद प्रेम से अपने बिलों का भुगतान करने की कोशिश करे और फिर भी यकीं नहीं हो तो बैंक में जाकर कुछ प्रेम जमा करवाने की कोशिश करे। और अगर फिर भी आप मानते हो की पैसा इतना महत्वपूर्ण नहीं है तो मेरे पास आपके लिए तीन शब्द है – आप कड़के थे , आप कड़के हो , और कड़के ही रहोगे। जब तक की आप इस बात को अपने दिमाग से हटा नहीं देते ।

संकेत न. ३- शिकायत करना –
शिकायत करना सबसे बुरी चीज़ है , मैं ब्रह्माण्ड के उस नियम में  बहुत बहुत विश्वास रखता हूँ जो कहता है – ” आप जिस पर ध्यान केन्द्रित करते है वह बढ़ता है “ शिकायत करते समय भी आप जिस चीज़ पर ध्यान केन्द्रित करते हो या सोचते हो – अपने जीवन की सही चीज़ों पर या अपने जीवन की गलत चीज़ों पर , इसलिए आपको वही मिलेगा जो आप सोच रहे हो और यही आकर्षण का नियम है , आप क्या आकर्षित कर रहे हो ? मैंने अक्सर देखा है की ऐसे लोग जो शिकायत करते फिरते है उनकी जिंदगी बड़ी तकलीफ में रहती है ,ऐसा लगता है की जो भी गलत दुनिया में होता है वो उन्ही के साथ होता है ।
फिर भी वो कहते है की जाहिर है मैं शिकायत करता हूँ पर देखो ना- मेरी जिंदगी में कितनी गड़बड़ है
अगर आप भी इन पीड़ितो में से है तो मैं आपको आपकी जिंदगी में सुधार के लिए एक रास्ता बताता हूँ जो मैं भी अपनाता हूँ – अगर 30 दिन तक आप किसी को दोष न दे , खुद को सही ठहराने की चेष्टा न करे और किसी की भी चीज़ों की, किसी से भी शिकायत न करे ।
फिर देखिये ये जादू आपकी जिंदगी में क्या रंग लाता है ,…..याद रखो की सफल व्यक्ति इन बातो को याद रखते है और उन लोगो से दूर रहते है जो ये सब करते है ।