बड़ा सोचो और बड़ा मांगो

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इंसान को अपनी सोच और सपनो को हमेशा बड़े रखना चाहिए। मैं अक्सर सेमिनार और मीटिंग में एक ही बात को दोहराता और वही बात मैं आप से भी कहना चाहता हूँ कि अगर मैं सोचता हूँ कि मैं महीने का 10 लाख रूपए कमाऊं तो ये मुमकिन है कि हो सकता है, मैं 10 लाख रूपए न कमा पाऊं मगर 7 लाख , 5 लाख , 4 लाख तो कमा ही पाउँगा। और अगर वही पर मैं ये सोचता हूँ कि मैं महीने का 20  हज़ार रूपए कमा लूँ तो बहुत है , तो हो सकता है कि मैं 20 हज़ार महीने का कमा लूँ ।मगर ये बात पक्की है कि मैं किसी भी महीने 20 हज़ार से ऊपर नहीं कमा पाउँगा। क्योकि मैंने सोचा ही 20 हज़ार का था। अक्सर मैंने देखा है कि हम लोगो कि सोच इतनी छोटी है कि बड़ा करने या सोचने कि हिम्मत ही नहीं जुटा पाते और इसी वजह से हम भगवान् से भी उतना ही मांगते है जितने कि जरुरत होती है या जितनी हमारी मांगने कि औकात हम समझते है। मैंने लोगो को अक्सर यही मागते हुए देखा है कि हे भगवान् 10-15 हज़ार कि नौकरी मिल जाये कुछ ऐसा कर दो , हे भगवान् मेरे बच्चो कि फीस का इंतजाम हो जाये कुछ ऐसा कर दो , हे भगवान् मेरा एक छोटा सा खुद का मकान  बना लूँ , हे भगवान् मेरे पास छोटी सी कार हो और सुखी परिवार हो , छोटी सी बीवी ,छोटे छोटे बच्चे ,छोटी सी जिंदगी ,और आखरी में छोटी सी कब्र जिसमे लोग लेटा दे। आखिर कब तक 2 लाख ,5 लाख ,10 लाख ही मांगते रहोगे और सोचते रहोगे , अरे यार मेरी आज तक यह समझ में नहीं आता कि मांगने में भी इतनी कंजूसी क्यों करते हो , भगवान् को कौनसा ९ से ९ नौकरी करके आपको कमा कर ला कर देना है। हाँ !!!!!!!!!! हो सकता है कि आप हक़ीक़त को जानते हो कि भगवान् से मांगो तो भगवान् सिर्फ रास्ता दिखाता है उसको कमाने या हासिल करने के लिए मेहनत तो  हमे  ही करना पड़ती  है ,शायद इसीलिए हम मांगने में कंजूसी करते है।  आप भी सोच रहे होंगे कि मैं कर्म पर विश्वास करने वाला मांगने कि बात क्यों कर रहा हूँ।  वो इसलिए कि मैं जानता  हूँ कि हम भगवान् से मांगने में कभी भी बाज़ नहीं आते और इसीलिए मैं आपको बताना  जरुरी समझता हूँ कि जब भी  हम भगवान् से मांगते है  तब  याद रखो कि आपकी जितनी भगवान् से मांगने कि सोच बनती है।  जिंदगी मैं सिर्फ उतना ही करने कि हिम्मत होती है, हम उतना ही कर पाते है और कमा पाते है । मगर मैं चाहता हूँ कि आपको ज्यादा मिले और खूब मिले ……सिर्फ जरुरत के लिए जीना है तो जानवर भी जी लेता है। मगर भगवान् ने इस जमीं पर हमे अपनी चाहतो को पूरी करने के लिए भेजा है, न कि जिंदगी को यूं ही  खर्च करने के लिए। भगवान् हर इंसान को पैदा करने से पहले, उसके पैदा होने का मकसद पैदा करता है परन्तु बस फर्क इतना है कुछ इंसान उस मकसद को याद रख पाते है और कुछ को याद ही नहीं आता कि वह पैदा क्यों हुए है।
काश कि ऊपर वाला हमारे पैदा होते वक्त एक चिट्ठी भी भेज सकता कि यहाँ हमे उसने क्यों भेजा है।
दोस्तों कल रात भगवान् मेरे सपने में आये थे और कहने लगे कि अगर मेरा इंसान को पैदा करने को मकसद नहीं होता तो क्या जरुरत थी, उनको पैदा करने कि पूरी ज़मीं पर मैं सिर्फ तरह तरह के जानवर ही पैदा करता और इतने में मेरी नींद खुल गई। …. क्या आपकी नींद खुली या नहीं ?