बन्दर तो पहले से ही है

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जंगल में एक नदी थी और नदी में ही एक पेड़ था, एक बार दो बन्दर उस पेड़ पर बेठे थे तभी आसमान  से अचानक आवाज आई कि…. जो बन्दर, ” नदी के पानी में कूद जायेगा वो वो इन्सान बनकर बहार  निकलेगा ”  तभी एक बन्दर ने,- न सोचा न समझा और छलांग लगा दी। । जब  वह बन्दर पानी से बहार निकला तो दुसरे  बन्दर ने पूछा की यार ये  बता तूने विश्वास कैसे कर लिया की जो भी, जिसने भी कहा वो सच कह रहा है तभी वो कूदने वाला बन्दर बोला की  मैंने सुना और कूद गया। .. अब इसमें विश्वास करने की कौनसी बात है…… अरे भाई  किसी ने कहा की  पानी में कूद जाओगे  तो इन्सान बन जाओगे ,मैं तो इसलिए कूदा  की हो सकता  है की कोई सच  कह रहा हो और मैं इन्सान बन जाऊं वर्ना मेरा क्या गया बन्दर तो पहले से ही था

सन्देश – शायद आप लोगो को यकीं हो या ना हो पर बन्दर तो हम पहले से ही है , जो किसी न किसी के इशारों पर नाचते रहते है और अगर ऐसे में हमे आज़ादी का मोका मिलता है तो हम विश्वास  नहीं करते  की ऐसा भी हो सकता है।  याद रहे की विश्वास सिर्फ अपने आप पर रखो की जहा भी कूदोगे वहा  से इन्सान बन कर निकलोगे। …… जहा भी  मोका मिले और दिल कहे  कूद जाओ  सिर्फ ये सोच कर की बन्दर तो पहले से ही  हूँ  कोई मेरा क्या बिगड़ लेगा पर  कूदने से ये हो सकता है की मैं इन्सान बन कर निकलूं