नकारत्मक सोच…

kutta-1

एक व्यक्ति था जिसे तारीफ सुनना बहुत अच्छा लगता था उसी तरह जैसे की हम सभी को लगती है
वो एक बार विदेश घुमने जाता है, वह सोचता है की मैं यहाँ से कुछ ऐसा ले कर जाऊ जिसे देख कर सभी तारीफ करे। उसे एक कुत्ता पसंद आता है- जिसकी एक खासियत थी की वह पानी के उपर चल सकता था , वह सोचता है की जो भी इसको देखेगा वो इसकी तारीफ करेगा और यही सोच कर वह उसे खरीद लेता है। जब वह लोट कर अपने घर आता है तब वह एक दोस्त को खाने पर बुलाता है परन्तु उसका खास मकसद उस कुत्ते की तारीफ करवाना था जो वह लाया था। जब दोस्त आया तब वह दोनों स्विमिंग पूल के पास बेठे , तभी उसने कुत्ते को आवाज़ लगाई ये दिखने के लिए की मेरा कुत्ता पानी पर चल सकता है ,कुत्ता उसके पास आ गया। उसने कहा की ये मैं विदेश से लाया हूँ ,…. इतना कहते हुवे उसने एक हवा भरी हुई गेंद को स्विमिंग पूल में फेकी और कुत्ते से लाने को कहा। कुत्ता उसकी खासियत दिखाते हुए पानी के उपर चल कर गया और गेंद ले आया , अब वह अपने दोस्त से पूछता है की देखा ,कुछ खास बात दिखी। ( वह उससे तारीफ की उम्मीद कर रहा था की वो कहे वह तेरा कुत्ता तो पानी पर चल सकता है )…… दोस्त कहता है हां देखा – की तेरा कुत्ता दुसरे कुत्ते जैसा नहीं है। हां सही कहा तूने ये खास कुत्ता है ,वैसे तुझे क्या खास लगा ? दोस्त – यही की तेरा कुत्ता पानी में तैर नहीं सकता

नकारात्मक सोच वालो को हमेशा कमी निकलने की आदत होती है शायद इसीलिए कभी वो जिंदगी में सफलता हासिल नहीं कर पाते ,वह कोई भी काम ये सोच कर करते है की इस काम से नुकसान क्या हो सकते है परन्तु सकारात्मक व्यक्ति हमेशा कमियों में भी खासियत तलाश करता है