दामादों को फांसी- Akbar and Birbal story

akbar and birbal motivational story ,akbar and birbal motivational stories ,akbar and birbal inspirational story ,akbar and birbal inspirational stoies

एक दिन बादशाह अकबर दरबार में आये , कोई भी कुछ पूछता तो उसे ग़ुस्से  में ही जवाब देते।  सभी दरबारी समझ गए की आज बादशाह का मुड़ ख़राब है। दरबार ख़त्म होने के बाद बीरबल ने बादशाह से उनके ग़ुस्से होने का कारण पूछा। बादशाह ने कहा – छोड़ो यार मेरा दामाद बड़ा बेकार है , हमेशा उलटी सीधी हरकते करता रहता है। अब देखो न की मेरी बेटी से मिले मुझे एक साल से ज्यादा समय हो गया  फिर भी वो उसे मिलने नहीं भेजता।
तो जहांपनाह इसमें इतनी नाराज होने वाली क्या बात है ? मैं आज ही बेटी को लेने किसी को भेज देता हूँ।
बादशाह – आदमी तो मैंने भी भेजा था , पर दामाद मानता ही नहीं। हकीकत  तो ये है की दामाद जाति ही ख़राब होती है। अब तुम एक काम करो , मैदान में कुछ फांसी के फंदे तैयार करवाओ। हम अपने राज्य के सभी दामादों को फ़ासी पर चढ़ा देंगे।
बादशाह को बीरबल ने बहुत समझने की कोशिश की लेकिन बादशाह का घुस्सा कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था।  वे किसी की कोई बात सुनने को तैयार ही नहीं हो रहे थे।  आखिरकार बीरबल ने एक मैदान में कुछ फांसी के फंदे तैयार करवा दिए।
जब बीरबल अकबर को मैदान में फंदे दिखाने ले गए , तो फंदे देखकर उनको तसल्ली हो गई।  वह बोले – ठीक है , अब मैं आपने राज्यों के दामादों का नामोनिशान  मिटा दूंगा। इतने में अकबर की नजर दो फंदो पर गई ,उसे देख ….वो चौक पड़े , जो चांदी और सोने की बनी  बने हुए  थे  । उन्होंने बीरबल से पूछा- अरे तुमने ये दो कीमती फंदे किसके लिए बनवाए है ?
बीरबल ने सर झुककर कहा- ये सोने का फंदा आप के लिए और चांदी का मेरे लिए। बादशाह ने कहा की मैंने तुम्हे ऐसा करने के लिए कब कहा था ? हम दोनों को फ़ासी पर  थोड़े चढ़ना है।
जहांपनाह आपने राज्य के सभी दामादों को फांसी पर चढ़ा देने का कहा है।  और हमभी  तो किसी न किसी के दामाद है।  जब सभी दामाद को फांसी दी जाये गई , तो हम कैसे बच पाएंगे।
आप बादशाह है इसलिए मैंने आपके लिए सोने का फंदा तैयार करवाया है और मैं खास आदमी हूँ इसलिए चांदी का फंदा तैयार करवाया है।
ये सब सुन कर बादशाह दंग रह गए  और उन्हें अपनी भूल समझ में आ गई।  उन्होंने तुरंत अपना फरमान वापस लिया और एहसास किया की ग़ुस्से में लिया फैसला कभी सही नहीं होता।
दोस्तों गुस्से में लिया फैसला कभी भी सही नहीं होता , अक्सर  ग़ुस्से में लिया हुआ फैसला दुसरो पर  ही नहीं आप पर भी उतना ही असर डाल सकता है बल्कि डालता ही है।  आप को सामने वाले से ज्यादा नुकसान होता है इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले एक बार उसपर विचार करले नहीं तो किसी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।