दादी की हांड़ी

chikan-1

एक व्यक्ति अपने घर में लेटा हुवा था और वो अपनी बीवी को चिकन बनाते देख रहा की उसकी बीवी चिकन के छोटे छोटे टुकड़े करके पकाने वाले बर्तन में डालती जा रही थी , अचानक उसके मन में एक सवाल आया की पुछु चिकन के छोटे छोटे टुकड़े क्यों काट रही है, इसको पूरा की पूरा क्यों नहीं बर्तन में पका लेती , क्या चिकन इस तरह बनाते है, टुकड़े कर कर के और अगर ऐसा बनाते है तो क्यों बनाते है ! …… यह व्यक्ति थोडा घुस्से वाला व जिद्दी पार्वती का व्यक्ति था। …. अब ये सवाल ले कर वो अपनी बीवी के पास पहुच गया और पूछा की ये बताओ की ये चिकन ऐसा ही क्यों बनाते है ? बीवी- कैसा ? पति -ये टुकड़े टुकड़े करके क्यों बनते है ? बीवी – ऐसे ही बनाते है , पति – ऐसे क्यों बनाते है पूरा क्यों नहीं डाल देते बर्तन में , बीवी ने उसकी बातो को अनसुना किया तो उसको घुस्सा आ गया ,बोला की बताना ही पड़ेगा की ऐसा क्यों बनाते है? बीवी ने बात को टालने के लिए कह दिया की मेरी माँ ऐसा बनती थी इसलिए मैं भी ऐसा बनती हूँ। …बिवि ने समझा चलो जान बची जवाब दे कर…। लेकिन वो कहा मानने वाला था , थोड़ी देर में पति बोला , लगा तेरी माँ को फ़ोन और पूछ की वो ऐसा क्यों बनती थी। बीवी को पता था की फ़ोन लगाये बिना छुटकारा नहीं मिलेगा। ।उसने अपनी माँ को फ़ोन लगा दिया और पूछा की, माँ तुम्हारे दामाद पूछ रहे है चिकन काट काट कर क्यों बनाते है? उसकी माँ ने कहा- ये कौनसा फालतू सवाल पूछ रही है ,…..माँ मैं नहीं तुम्हारे दामाद पूछ रहे है। माँ ने भी प्रश्न क्यों आगे बड़ा दिया और वही जवाब दे दिया की मुझे नहीं पता मेरी माँ ऐसा बनती थी इसलिए मैं भी ऐसा ही बनाती हूँ और तुझे भी वैसा ही सिखा दिया। … खैर बात यही खत्म होने वाली नहीं थी। …यह जवाब सुनकर पति बोला मुझे मेरे सवाल का जवाब चाहिए तू अपनी दादी को फ़ोन लगा और पूछ। …फ़िर क्या था पत्नी ने अपनी दादी को फ़ोन लगाया और वही सवाल किया। ….. उसकी दादी ने पहले तो जवाब दिया की मुझे नहीं पता। ।पत्नि ने कहा की आप का दामाद बिना जवाब सुने चुप नहीं बैठेंगे आप तो जानती हो की कितने जिद्दी है ये। …।फ़िर दादी ने जवाब दिया की मैं इसलिए ऐसा पकाति थी क्योकि मेरी हांडी छोटी थी और उसमे पूरा चिकन नहीं पकता था इसलिए मैं उसके छोटे छोटे टुकड़े करके हांडी में डालती थी ताकि वो अच्छी तरह पक जाये।
सन्देशइसी तरह हर चीज़, कई सालो से परंपरा के नाम पर चली आ रही है जैसे किसी बच्चे से पूछो की बड़ा होकर क्या बनेगा ,उसके माँ-बाप ने पहले ही प्रोग्राम सेट किया हुवा है की इंजिनियर या डाक्टर। …
लोगो को आदत हो गई है की नोकरी करना ,घर लोटना ,टीवी देखना ,सोना ,उठना ,और फिर काम पर चले जाना। ।गधे बन गए है रोज रोज वही बोझ उठा उठा कर , …। इन परंपरा ,इन आदतों को हम बदल सकते है परन्तु कई लोग हालत के सामने उसी तरह हार मन लेते है और उसको परंपरा का नाम दे देते है