जो भी करना चाहते हो वही करो।- Motivational stories and inspirational stories in hindi

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मुझे अच्छी तरह से याद है जब मैं छोटा था तो मेरे पिताजी हमेशा मुझ पर यही दबाव बनाते थे की मैं बड़ा होकर डॉक्टर ही बनू। लेकिन मैं बचपन से ही बगावती किस्म का इंसान रहा हूँ। कोई मुझे कहता की उत्तर तो मैं दक्षिण कहता। इसका मतलब ये नहीं की मैं किसी की बात नहीं मानता था… बस मुझे पंगे लेने में मजा आता है… ऐसा ही समझ लो। जब मैं बड़ा हुवा तो मैंने Maths subject  लिया, ताकि डॉक्टर न बनना पड़े। फिर पिताजी ने भी अपना मकसद बदल लिया की कोई बात नहीं तू  Engineer  बनेगा। वो क्या है कि जो मेरी  Problem  है वही उनकी भी  कि वो भी किसी चीज़ से हार  नहीं मानते ,…नाह धो कर पीछे पड़ते है। जैसे तैसे मैंने उनकी बात तो मान ली लेकिन  Engineer बनकर कोई फायदा नहीं हुवा क्योकि मैंने कभी  Job  करने का  सोचा ही नहीं था। क्योकि मेरा शुरू से  Job के बारे में बड़े ही अच्छे विचार रहे है और वो ये कि जब आप को पता चल जाये के आप दुनिया में कुछ भी नहीं कर सकते तो इसलिए अपने आपको  किसी के यहाँ कुछ percent  में गिरवी रख दो तो आप कि रोजी रोटी तो चल ही जायेगी। माफ़ करना मेरा इरादा किसी को hurt  करने का नहीं है और न ये कहना चाहता कि  Job से किसी का भला आज कि Date  में नहीं हुआ है बल्कि ये सिर्फ मेरा वहम था या जो भी कह लो। बस मैं तो एक Businessman  बनाना चाहता था एक बड़ा Businessman, और मैंने Business बिना पूंजी के Start  कर दिया…… हां तकलीफ तो बहुत आई परन्तु कहा न कि मेरा कुछ Behavior  ही ऐसा है। अपने Business को आगे बढ़ाने के लिए मैंने MBA किया परन्तुं बिना पूंजी Success  मिलना बहुत मुश्किल था, ये समझ आने लगा था…… लेकिन फिर भी मैंने हार  नहीं मानी और सफलता भी मिलने लगी शायद इसलिए क्योकि मैं जो चाहता था वही कर रहा था। लेकिन तक़दीर को कुछ और ही मंजूर था। मुझे एक बड़ा नुकसान का सामना करना पड़ा और फिर मैं वही खड़ा हो गया जहा से मैंने चलना Start  किया था। ऐसे मैं, मेरे करीबी मित्र अतुल शर्मा ने मुझे MLM के बारे  में बताया की ये Industry  है,जहा तुम कम समय में ज्यादा पैसे कमा सकते हो, मैं मानता नहीं परन्तु मेरे पिताजी से ऐसे ही मैं राय मांग ली कि करना चाहिए या नहीं….. बस फिर क्या था। वही पुरानी जंग फिर छिड़ गई और मैंने ठान लिया कि अब तो यही करूँगा। इसलिए नहीं कि मैं उनकी इज्जत  नहीं करता , इसलिए उनका विरोधी बन जाता हूँ। या उनकी बात नहीं सुनना चाहता बल्कि मैं सिर्फ अपने बलबूते पर जंग लड़ना चाहता था। और मैंने वहाँ  भी बेशुमार  सफलता पाई और आज मेरे पास सब कुछ है जिसके लोग सपने देखते है…….. मेरा मकसद हमेशा बड़ा रहा है इसलिए आज भी सिर्फ उस बड़े काम कि तलाश में जो भी काम करता हूँ  ,उसमे सफलता पाते चला जाता हूँ। क्योकि मैं छोटी जिंदगी कभी जीना ही नहीं चाहता। दोस्तों मैं अपनी कहानी के माध्यम से आप को सिर्फ यही बताना चाहता हूँ कि आप कुछ भी करे लेकिन करे वही जो आप चाहते हो , तभी सफलता मिलेगी। मैं उन माता- पिता से भी हाथ जोड़कर यही Request करना चाहता हूँ कि आपके बच्चे जो भी करना चाहते है उन्हें करने दे और उन्हें बनने दे जो वह बनना चाहते है। मैं मानता हूँ की कोई माँ – बाप अपने बच्चे का बुरा नहीं चाहते परन्तु ये भी तो गलत है कि जो वह चाहते है ।आज बच्चा पैदा भी नहीं होता कि माँ – बाप पहले से सोचने लग जाते है कि वह क्या बनेगा?  मैं सिर्फ उनसे यही सवाल पूछना चाहता हूँ कि आज कि दुनिया जहा रात भर  में कई आविष्कार  हो जाते है , जहा पल पल में दुनिया बदल रही है और आप लोग २० साल बाद का निर्णय आज ले रहे हो कि वो क्या बनेगा ? याद रखो वही पंछी ज्यादा उचाइयो को छूता है जिसे बांध के न रखा गया हो।

अंत में आप से यही कहना चाहता हूँ दोस्तों की  जो  भी करना चाहते हो वही करो। ताकि आपको  जिंदगी में कभी इस बात का अफ़सोस न रह जाए कि काश आप जो चाहते वो करते तो शायद आपको सफलता मिल जाती।  मेरा मानना है कि जो व्यक्ति अपना भविष्य खुद चुनता है उसके हारने का सवाल ही पैदा नहीं होता और अगर असफल हो भी गया तो कम से कम आप जिंदगी भर किसी ओर को तो दोष नहीं दोगे की  तुम्हारी वजह से ऐसा हुआ।