ज़िन्दगी के दो पहलु…

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हर सिक्के के दो पहलु होते है , वैसे हर चीज के दो पहलु होते है। उपर – निचे ,अन्दर – बाहर ,प्रकाश -अन्धकार , आकाश -धरती ,गर्म -ठंडा ,तेज -धिमा ,दाया – बाया।
एक का अस्तित्व दुसरे के बगैर अधुरा है , वैसे हे दौलत ( धन ) का अंदरूनी और बाहरी हिस्सा होता है।- बाहरी -वयवसाय का ज्ञान, धन का प्रबंधन ,और निवेश की तकनीक इत्यादि। लेकिन अंदरूनी खेल भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की बहार का ,उदाहरण -कारपेंटर और उसके औजार – अच्छी कारीगरी के लिए अच्छे औजार जरुरी है लेकिन अच्छे औजारों का कुशलता पूर्वक प्रयोग उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है तो आप कौन है? , आप किस तरह सोचते है? ,धारणाये कैसी है? ,आपकी आदते कैसी है? ,खुबिया क्या है ?, आप अपने बारे में कैसा महसूस करते है , क्या आप वाकई महसूस करते है की आप दौलतमंद बनने के हक़दार है या काबिल है ? डर , चिंता और सारी परेशानियों के बावजूद कितना काम कर सकते है,क्या मुड़ न होने पर भी काम करते है ?

सच तो यह है की आपका चरित्र ,सोच और आपका विश्वास ही ,आपकी सफलता के स्तर को निर्धारित करते है
याद रखो की फल जड़ो से मिलते है – एक पेड़ की कल्पना करे की यह जीवन एक पेड़ है और इस पेड़ पर फल लगे है ,फल मिलने वाला परिणाम है ,हम इन फलो (परिणामो ) को देखते है और हमे वह पसंद नहीं आते – वे कम है , छोटे है ,या कड़वे है या स्वाद हमे अच्छा नहीं लगता। तो आदतन हम क्या करते है ,हममे से ज्यादातर लोग फलो (परिणामो )पर ध्यान केन्द्रित करते है पर ये भूल जाते है की ये फल तो बिज और जड़ो से उत्पन्न हुए है ,जो जमीं के अन्दर है और वही जमीं के ऊपर के चीजो को पैदा करता है
याद रखो की जो दिखता नहीं वह न दिखने वाली चीज़ों को पैदा करता है और वह सब से ज्यादा ताकतवर होता है जैसे हवा जो हमे दिखाई नहीं देती लेकिन उसके बगैर हम जिन्दा ही नहीं रह सकते , जैसे की – करंट , जो हमे दिखाई नहीं देता बस महसूस कर सकते है और अगर यकीं न आये की यह कितना ताकतवर होता है तो इसे छु कर देखलो !
इसका मतलब यही है की की अगर आप अच्छे फल या अच्छे परिणाम अपनी जिंदगी में चाहते हो तो दिखाई देने वाले फलो और परिणामो की चिंता छोड़ कर हमे पेड़ की जड़ो पर ध्यान देना होगा ,हमारे अन्दर जो है उसपर ध्यान देना होगा उसमे ही बदलाव करना होगा तभी हमारी बाहरी परिस्थिति बदलेगी