चार महिलाए…….

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एक गाँव में एक ऋषि था जिसके पास हर व्यक्ति दीक्षा के लिए जाता था परन्तु वह ऋषि किसी भी महिला को दीक्षा नहीं देता था। …एक दिन चार महिला उसके आश्रम इस नियत से गई की चाहे कुछ भी हो हम उन्ही से दीक्षा लेंगे। जब वे आश्रम पहुची तो उन्हें उस ऋषि के एक शिष्य ने आश्रम के बहार के दरवाजे पर ही रोक दिया और कहा की तुम्हे पता नहीं है की इस आश्रम में महिलाओ का आना भी मना है। । तभी उन महिलाओ ने कहा की हम चोरो ऋषि जी से मिलना चाहते है और हम कसम खा कर आये है की चाहे कुछ भी हो जाये हम उन्ही से दीक्षा लेंगे , ये सुन उस शिष्य ने उन्हें वहा से जाने को कहा परन्तु वो महिलाए किसी भी कीमत पर वह से जाने को तैयार नहीं थी , ये देख शिष्य समस्या को लेकर अपने ऋषि के पास गया और सारी बात बताई। … ऋषि समझ गया की ये ऐसे नहीं जाएँगी। …. उसने कहा की आप लोग दरवाजा लगा दो , वे कुछ देर इंतजार करेंगी और चली जाएँगी , शिष्यों ने वैसा ही किया,…… उस दिन काफी बारिश हो रही थी,……आधी रात को एक शिष्य ने देखा की वह महिलाए, आश्रम के बहार बेठी है और बारिश में पूरी तरह भीग चुकी है ,… यह देख वह शिष्य पुनः अपने ऋषि के पास गया और सारी बात बताई ,… ऋषि समझ गए थे की ये मुझसे मिले बगैर यहाँ से जाने वाले नहीं है उसने कहा – चारो को आश्रम में बुलाओ मैं उनसे मिलना चाहता हूँ,… मिलने पर ऋषि ने उन्हें समझाया की वह किसी भी महिला को दीक्षा नहीं देता इसलिए वे जिद्द न करे और अपने घर लोट जाये परन्तु वे चारो कहने लगी हम दीक्षा लिए बगैर यहाँ से नहीं जायेंगे उनकी, ये जिद्द देख कर ऋषि बोले – मैं उसी महिला को दीक्षा दूंगा जो मेरे पूछे गए प्रश्न का सही उत्तर देगी,… महिलाए ये सुनकर तैयार हो गई ,… तभी ऋषि ने सब को अलग अलग अपने कक्ष में बुलाया और प्रश्न किए ,……
पहली महिला – ये महिला कुवारी थी -इससे प्रश्न किया की समुद्र में एक नाव है और उस नाव में 50 पुरुष और तुम अकेली महिला , अगर वह 50 पुरुष तुम पर हमला बोल दे तो तुम उन 50 पुरुषो से अपनी इज्जत की रक्षा कैसे करोगी ? महिला ने कहा – की मैं समुद्र में कूद कर जान दे दूंगी,…यह उत्तर सुन कर ऋषि ने उसे जाने को कहा
सन्देश– अक्सर हममे से कुछ लोग ऐसा ही करते है ,.. मुश्किलो का सामना करने की बजाय अपनी जान देना आसान समझते है,… याद रखो की कोई भी मुश्किल आपकी जान से ज्यादा कीमती नहीं है
दूसरी महिला – ये महिला एक वेश्या थी- इससे भी वही प्रश्न किया की एक समुद्र और उस समुद्र में एक नाव है और उस नाव में 50 पुरुष और तुम अकेली महिला, अगर वह 50 पुरुष तुम पर हमला करे तो तुम उन 50 पुरुषो से अपनी इज्जत की रक्षा कैसे करोगी ? महिला ने कहा – क्या फर्क पड़ता है , जो करना चाहे कर ले। …यह उत्तर सुन कर ऋषि ने उसे जाने को कहा
सन्देश – हममे से कुछ लोग इसी तरह सोचते है क्या फर्क पड़ता है ,… क्या फर्क पड़ता है अगर बच्ची हमारी अच्छी स्कूल में नहीं पड़ती ,क्या फर्क पड़ता है की माँ बाप का इलाज अच्छे अस्पताल में नहीं करा सकते , क्या फर्क पड़ता है की बच्चा कोई खिलौना मांगता है और हम कहानी सुना देते है की खिलौना ख़राब है, क्या फर्क पड़ता है की कार नहीं है, मकान नहीं है ,क्या फर्क पड़ता है अगर ये सोचते है की अच्छे से दो वक़्त की रोटी तो खा रहे है …. क्या वाकई इन सब से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए ?
तीसरी महिला – ये महिला शादीशुदा थी – इससे भी वही प्रश्न किया की एक समुद्र और उस समुद्र में एक नाव है और उस नाव में 50 पुरुष और तुम अकेली महिला, अगर वह 50 पुरुष तुम पर हमला करे तो तुम उन 50 पुरुषो से अपनी इज्जत की रक्षा कैसे करोगी ? महिला ने कहा – मैं उन 50 पुरुषो में से एक से शादी कर लुंगी ,जब वो मेरा पति बन जायेगा तो वही मेरी रक्षा करेगा ,…यह उत्तर सुन कर ऋषि ने उसे जाने को कहा
सन्देश– हमारे समाज में जब किसी की शादी होती है तो हम सभी जानते है की महिला की रक्षा पुरुष ही करता है परन्तु ये समाज की बात है,यहाँ हर व्यक्ति की बीवी है और किसी पर कोई हमला करने से पहले डरता है, परन्तु वह वो ५० लोग जिनके पास बीवी नहीं है और ना कोई समाज,….. ऐसी स्थिति में कोई एक पुरुष , बाकि के उन 49 पुरुषो से अकेला लड़ पायेगा क्या ? हममे से ज्यादातर लोग यही सोचते है और करते है की जो एक परिस्थिति का हल है, वही किसी और परिस्थिति में भी इस्तमाल करते है और नाकामियाब हो जाते है,.. याद रखो की हर परिस्थिति का हल अलग होता है
चौथी महिला – इससे भी वही प्रश्न किया की एक समुद्र और उस समुद्र में एक नाव है और उस नाव में 50 पुरुष और तुम अकेली महिला, अगर वह 50 पुरुष तुम पर हमला करे तो तुम उन 50 पुरुषो से अपनी इज्जत की रक्षा कैसे करोगी ? हाथ जोड़ते हुवे महिला ने कहा- की मुझे नहीं पता , आप मेरे गुरु है आप ही बताइए ?
इसका उत्तर सुन कर ऋषि खुश हो गए और उसे दीक्षा देने को तैयार हो गए
सन्देश – हममे से कुछ ही लोग होंगे जो उसकी इज्ज़त करते है या शक नहीं करते है, जो हमे सिखाता है ,हम अक्सर उनके बाप बनने की कौशिश करते है
याद रखो की जो हमें सिखाता है चाहे वो कोई भी हो गुरु हो ,बॉस हो ,माँ बाप हो ,मित्र हो,…. आप उनकी हर बात मानिये, क्योकि सिखाने वाला , आपको आपकी तरक्की के लिए सिखाता है वर्ना वो सिखाएगा ही क्यों परन्तु हम लोग उन पर भी शक करने लगते है की कही ये गलत तो नहीं बता रहा