क्या किस्मत जैसी कोई चीज़ होती है ?

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अक्सर सेमिनारो में मुझे ”किस्मत ” के बारे में सवाल पूछते है कि क्या किस्मत जैसी कोई चीज़ होती है ? या किस्मत का हमारी सफलता और असफलता में क्या योगदान होता है। आप ही बताइये ये मैं क्या जवाब देता। बिलकुल सही सोच रहे हो क्योकि मैं भी आपकी  तरह किस्मत को नहीं मानता पर जब ये सवाल मेरे सामने बार बार आता है तो मैंने इसके बारे मे सोचना उचित समझा। दोस्तों मेरे ज्ञान और अनुभव के आधार पर मेरा मानना  है कि” मौके और तैयारी का मिलन ही किस्मत है ” अक्सर मैंने देखा है कि हम लोग सफलता पाने के लिए ध्यान नहीं लगते बल्कि रोज मर्रा कि जिंदगी में उलझे रहते है। बीवी ने कहा पानी नहीं आ रहा हम नल में घुस जाते है ,बच्चों ने कहा कि पापा खिलौना ख़राब हो गया है तो हम खिलोने में घुस जाते है , दिन भर न जाने कितने ही ऐसे काम होते है जो हम खुद न करे तो भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा और करते भी है तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता ,लेकिन हम जरुरी और अवस्यक कामो में ध्यान लगाने कि बजाए अनावश्यक और गैरजरूरी कामो में अधिक ध्यान लगते है यही कारण है कि जिंदगी में मिलने वाले मौको को या तो हम देख नहीं पाते या उनका सदुपयोग ही नहीं कर पाते। फिर ऐसे ही लोग जीवन भर अपनी किस्मत का रोना रोते रहते है। ये बात सही है कि जीवन में सब कुछ हमारी इच्छा के अनुसार नहीं होता परन्तु जो कुछ भी हमारे अधिकार क्षेत्र में है ,उसे हम अपनी मेहनत एवं तैयारी से हमेशा जारी रखना चाहिए और दिल लगा कर सफलता के लिए प्रयास करना चाहिए क्योकि मेरा मानना है कि भगवान्  न तो अंधा  है और न ही बहरा , वह हमारे द्वारा कि गई सच्ची मेहनत का फल अवश्य देता है। इसलिए हमे चाहिए कि लगन के साथ अपने कार्य में लग जाए तथा अपने आपको हमेशा सतर्क रखे ताकि कोई भी अवसर हमारी आखो के सामने से गुजर न जाए। मौका मिल जाये तो ठीक वर्ना उसको खोज कर निकालो और मैं जनता हूँ कि हर इंसान ये कर सकता है, बस हिम्मत चाहिए। किसी ने सच ही कहा है कि हिम्मत -ऐ -मर्दा तो मदद -ऐ- खुदा। मैंने ऐसे लोगो को भी देखा है जो अच्छे फल के बीज मिल जाने पर भी सिर्फ उसको जेब में रख कर घूमते रहते है , सिर्फ इस आस में कि इस बीज से एक दिन पेड़ बनेगा और वो पेड़ फल देगा क्योकि उसकी सोच एक आलसी  इंसान कि तरह  है जो सोचता है कि बीज से फल और फल से पेड़ बनते ही है। पर शायद दोस्तों ऐसा नहीं है क्योकि हर बीज पेड़ नहीं बनता और हर पेड़ फल नहीं देता मेरा मानना है कि वही बीज पेड़ बनता हैऔर वही पेड़ फल देता है , जिसका ध्यान रखा गया हो और जिसे सही उपजाऊ जमीं में डाला गया हो ,पानी का धुप का खाद का और उसकी सिचाई का ध्यान रखा जाता है। इसी प्रकार जब हम मौके के बीज को मेहनत और लगन कि खाद से सींचते है तो सफलता का फल जरुर मिलता है। परन्तु कुछ लोगो में धीरज कि कमी होती है वह वह बीज को धरती  में डाल तो देते है और पानी भी देते है परन्तु रोज इसे जमीं से निकल कर देखते है कि बीज में से अंकुर निकला है कि नहीं या बड़ रह है या नहीं। ऐसे लोगो को मैं समझाना चाहता हूँ कि भाई यदि आप बीज बोएं तथा और उसमे पानी भी दे और उसको अगले दिन खोद कर निकले तो क्या मिलेगा,… एक गीला बीज। इसी तरह मौके के बीज को मेहनत एवं लगन कि खाद के साथ साथ धीरज की  धुप की भी आवश्यकता होती है।