कील ज्यादा नहीं चूब रही होगी …..

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एक व्यक्ति ने आपने दोस्त को अपने घर खाने पर बुलाया , दोनों दोस्त जहा पर खाना खाने बेठे थे वही पास में एक बिल्ली टेबल पैर बेठी थी , वह दोस्त जो खाना खाने आया था वह उस बिल्ली को देख रहा था। इतने में बिल्ली थोड़ी सी (अपनी जगह पर ही ) थोड़ी खड़ी हुई और चिल्लाई- मियाऊऊऊ। और फिर वापस उसी जगह पर बेठ गई … ये सब वो देख रहा था। ….फ़िर थोड़ी देर बाद वही हुआ की वह बिल्ली थोड़ी खड़ी और चिल्लाई- मियाऊऊऊ , और फिर से वही बेठ गई। …यह देख उस व्यक्ति से रहा नहीं गया उसने अपने दोस्त से पूछा की यार तेरी बिल्ली चिल्ला क्यों रही है ? उसे क्या तकलीफ है ? उसने कहा छोड़ यार तू खाना खा। उसने सोच कोई बात नहीं और फिर खाना शुरू कर दिया लेकिन थोड़ी देर बाद फिर से वही हुआ, की बिल्ली थोड़ी खड़ी और चिल्लाई -मियाऊऊऊ। तो उससे रहा नहीं गया उसने कहा यार कुछ ना कुछ तो गड़बड़ है ,बिल्ली को कोई ना कोई तकलीफ जरुर है। दोस्त बोला – अरे यार कोई तकलीफ नहीं है। बात यह है की बिल्ली जिस जगह पर बेठी है वहा टेबल पर एक कील निकली हुई है। वो उसी कील पर बेठी है , वह कील उसको चूब रही है। तो दोस्त बोला – जब उसे कील चूब रही है तो बिल्ली उठ कर दूसरी जगह क्यों नहीं जाती ? तो उसने कहा – ज्यादा नहीं चूब रही होगी इसलिए वो वही पर बेठ जाती

सन्देश- मैंने कई लोगो को कई बार आपस में बाते करते रहते है की यार मेरे काम में बहुत परेशानी है ,वहा ये सुविधा नहीं है वो नहीं है ,तमाम बुराई करते है लेकिन फिर भी वही काम करते है। जब काम वही करना है तो चिल्लाते क्यों है और अगर इतनी ही परेशानी है तो किसी और जगह काम करो पर …न जाने कौन सी ऐसी बात होती है जो कील चुबने पर भी उसे वही बेठने पर मजबूर कर देती है या तो उठ कर किसी और जगह जाने का दम नहीं बचा या बस जिंदगी जैसे चल रही है चलने दो और वही बेठे रहो याद रखो यदि आप जिंदगी में कोई तकलीफ को महसूस करते हो तो खड़े होकर उसका समाधान तलाश करना चाहिए , न की तकलीफ को सहते रहना चाहिए। यदि तकलीफ सहते रहोगे तो जिंदगी नासूर बन जाएगी