निर्देश दे कर तो देखो !!

एक गाँव में एक मेला लगा हुवा था।  वह पर एक हवाई जहाज उड़ाने वाला भी अपना जहाज लेकर आया  था जो की लोगो को हवाई यात्रा करावा कर अपनी रोजी रोटी कमाता था। वह एक हवाई चक्कर का 5000/- रूपए ले रहा था।   उसी गाँव  में एक किसान रहता था।  वह किसान रोज आकर लोगो को उड़ते हुए देखता था।  उसका मन भी उड़ने का करता पर पैसे न होने की वजह से वह केवल सोचता ही रहता। उसकी उड़ने की भूख दिन पर दिन बढ़ती गई।  आखिर एक दिन वह पायलट के पास बात करने पहुँच ही गया। और बोला ” मैं भी उड़ना तो चाहता हूँ पर एक भी रुपया नहीं देना चाहता।  क्या हम कुछ और  लेनदेन कर सकते है ?”
पायलट ने एक मिनट विचार किया और यह  शर्त रखी  की मैं तुम्हे मुफ्त में घुमाऊंगा यदि तुम कुछ नहीं बोलोगे।  यदि तुम चीखोगे नहीं , एक शब्द भी नहीं बोलोगे  और न  ही ऊपर से झाँकोगे तो तुम्हारे लिए उड़ान मुफ्त है।  परन्तु यदि तुमने एक आवाज भी निकाली तो तुम्हे 5000/- रुपए के बदले 50000/- रुपए एक उड़न के देने होंगे।
किसान ने भी इस विषय  और शर्त के बारे में एक मिनट सोचा और कहा ” ठीक है। परन्तु मेरी पत्नी  भी उड़ान के लिए जाना चाहती है।  क्या उसके लिए भी यही शर्त है ?”
किसान और उसकी पत्नी दोनों अपने होंठो को सील बंद कर हवाई जहाज में बैठ गए और उड़ने लगे।  ज़मीन से बीस फ़ीट ऊपर पायलट ने जहाज को उल्टा किया और गति बड़ा दी। तब उसने दाई और मुड़ते हुए कलाबाजियाँ  लगाई , जहाज को सीधा किया और फिर मुड़ा और फिर बाई  और घुमा।  फिर उसने आकाश में दो बार 8 की आकृतिया बनाई।  उस वक़्त हवाई जहाज़ अपनी पूरी गति पर  था।
उसने प्लेन के अगले हिस्से को ऊपर उठाया और वे ऊपर , ऊपर और ऊपर उठते हुए कई हजार फ़ीट उचाई पर पहुँचे। वह पहुँच कर प्लेन स्थिर कर दिया।  और फिर वह से निचे की और गिरना चालू किया , लगभग २० फ़ीट की ऊंचाई पर पायलट ने उसे नियंत्रण में किया और दोष रहित लैंडिंग की।
पायलट किसान की और मुड़ा और कहा – ” ये आश्चर्यजनक था।  तुमने कोई आवाज नहीं की।  मैं यक़ीन नहीं कर पा रहा हूँ। ” उसने किसान से पूंछा की क्या ऐसा कोई वक़्त नहीं आया जब तुमने कुछ कहना चाहा  हो या कहने का मन किया हो?
किसान ने सोचा , फिर सर हिलाया और कहा – हाँ , जब मेरी पत्नी बहार गिरी।
ये किसान एक ऐसा व्यक्ति था जो जानता था की उसे क्या चाहिए था।  वह इस बात में बिलकुल स्पष्ट था।  मैं यह मजाकिया तौर पर यह कहानी इस लिए आप को बता रहा हूँ ताकि याद रहे क्योकि वक़्त और हालत , जब इन चीजो की आपको सबसे ज्यादा जरुरत पड़ती है तब आपको कोई भी बात याद नहीं रखने देते।  और हम जैसो की सारी मेहनत पानी में बाह जाती है।
मैं सिर्फ आपको ये बताना चाहता हूँ कि इंसान जो दिमाग में चाहता है वो पा लेता है।  एक बात याद रखो कि हम सब के पास जो बुद्धि है उसमे अस्सी ख़राब दिमागी कोशिकाएँ है, वे केवल निर्देश पूछती है।  अपनी बुद्धि का उपयोग करने के लिए केवल यह बताना होता है की हमे जाना कहा है या कहा जाना चाहते है और वास्तव में हमारी बुद्धि हमे वह  ले जाती है। यही चीज आपके साथ भी हो सकती है क्योकि आपके पास भी बुद्धि है…. बस आप उसे निर्देश देने से डरते हो या फिर निर्देश दे भी देते हो तो  हजारो यहाँ वहा की  और मुश्किलो के बारे में सोच कर उसे गलत निर्देश दे कर रोक देते हो। मेरा यकीं मानिये अगर आप ठीक ठीक तरीके से यह जानते हो की आप क्या चाहते हो, तो वो आप पा सकते हो, बस ईमानदारी से निर्देश देना सीखो।