काम को बोझ न समझें।

एक नन्हा सा बालक तरबूज बेचा रहा था।  सुबह नदी के उस पार  जाकर  तरबूज लाता और गलियों में घूम घूम कर चिल्लाता , तरबूज ले लो।  रोज इसी तरह तरबूज बेचता, पर कुछ ही तरबूज बेच पता। आज  तो वह बहुत निराश था क्योकि तीन दिनों से उसका एक भी तरबूज नहीं बिका था।  लेकिन लोगो को, दुसरो की दुकानो से तरबूज खरीदते देख रहा था। उसकी कुछ समझ में नहीं आता की आखिर उसके तरबूज क्यों नहीं बिक पा रहे  है, जबकि उसके तरबूज दुसरो से काफी अच्छे है।
उसकी माँ तीन दिनों से उसे हटस लौटते देख रही थी।  आखिर कार माँ ने उससे कहा बेटा, तू इतना सुस्त होकर और निरुत्साहित होकर पुकारेगा तो कौन तेरे तरबूज खरीदेगा।  सुस्ती हटा और उत्साह ला, दुसरो से कुछ अलग तरीको से बेच , लोगो का ध्यान आकर्षित कर, बेटे को अपनी माँ की बात जंची।  अगले दिन वो शहर गया और जोर जोर से पुकारने लगा।  नदी के उसपार के तरबूज, खास आपके लिए।  मिश्री जैसा मीठा ,इतना स्वादिष्ट की  एक बार खाओगे तो बार बार याद करोगे क्योकि ये नदी के उसपर ही मिलता है। आज उसने  आपने तरबूज की कीमत भी पहले से ज्यादा कर दी थी।  जब शाम को घर जाने का वक़्त आया तब वह यह देख और सोच कर हैरान रह गया की उसके पास आज एक भी तरबूज नहीं बचा, सारे की सारे  तरबूज बिक गए।
याद रखो दोस्तों अगर आप अपने कार्य के प्रति उत्साहित रहेंगे और दूसरो या भीड़ से कुछ अलग करेंगे तो आपकी तरक्की को कोई नहीं रोक सकता। हममे से ज्यादातर लोग अपने कार्य को बोझ समझकर  ही  करते है कोई आपने कार्य से प्यार नहीं करता।  अगर वाकई ऐसा है तो आप वो कार्य क्यों नहीं करते जिससे आप प्यार करते हो या जिसे जिंदगी में  उत्साह के साथ कर सको।  आपने कभी नीलामी की बोली देखि है।  वहा बोली लगवाने वाला इस तरह उत्साह से बोली के लिए चिल्लाता है की बोली लगाने वालो में उत्तेजना आ जाती है और वे बढ़  चढ़कर बोली लगाते है और वह चीज़ो को उनकी हैसियत से भी ऊँचे दाम  में खरीद लेते है। आप ही सोचो की अगर कोई सुस्त आदमी बोली के लिए पुकारे तो क्या कोई भी चीज़ खरीदेगा ? नहीं। ।   आज से आपके पास दो ही विकल्प है – जो काम कर रहे हो ,उसको पुरे मन से और उत्साह के साथ करिए।…. या …… उस काम को छोड़ कर वह काम करने लगे जिसे करने से , अपने आप को उत्साहित महसूस करने लगो।