आपके अंदर आग होनी चाहिए

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दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी बात बताने जा रहा हूँ जिसे अगर आपने, अपना लिया तो निश्चित ही आपकी जिंदगी में भी वह सब कुछ होगा जो मेरी जिंदगी में है। आप भी वह सब पा सकोगे जो मैंने पाया है। आइये देखे   ऐसी कौन सी बात है जिसे मैं इतना महत्त्व दे रहा हूँ। वो है ” आग ” हां आग… आग- जिंदगी में कुछ कर गुजरने की , आग- दुनिया में आपने आपको साबित करने की , आग – वो सब कुछ पाने कि जो हम पाना चाहते है , वही आग – जो मेरे अंदर है और उन लोगो के अंदर है जिन्होंने कामियाबी पाई है। मेरा मानना है कि” शांत आदमी मुर्दे के सामान होता है और मुर्दा कितना भी खूबसूरत क्यों न हो उसके पास कोई भी ज्यादा देर बेठ नहीं सकता ” आप जब तक अपने जीवन में आग पैदा नहीं करोगे तब तक कामियाबी मिलना बहुत दूर कि बात है। याद रखो कि जिस तरह रॉकेट के पीछे आग लगते ही वह ऊचाइयों को, आसानी से छू लेता है ……उसी प्रकार जब तक आप के अंदर वह आग नहीं होगी तब तक आपके ऊचाइयों पर पहुचने के सपने , सिर्फ सपने ही रहेंगे हक़ीक़त नहीं बन पाएंगे। अगर एक बार आप के अंदर ये आग लग गई तो आपकी सारी परेशानिया और मुसीबते इसमें जल कर खाख हो जाएगी।
आप सोच रहे होंगे की ये आग कैसे जलेगी ?, कैसे लगेगी अंदर ये आग ? बहुत ही आसान है। मेरे अंदर ये आग मैं ऐसे जलाता हूँ। मैं हमेशा अपने से ज्यादा कामियाब इंसानो से मिलता हूँ और उनकी जिंदगी को करीब से जानने कि कोशिश करता हूँ और मुझे कुछ ही देर में समझ आ जाता है कि जिंदगी इतनी अच्छी भी हो सकती है। मैं घर आकर उसके पास की  हर वो चीज़ को ध्यान में लाता हूँ जो मेरे पास नहीं है। जैसे की कार, घड़ी, मोबाइल, घर, पेन, चश्मा, हर वो चीज़ जो लोगो का पाने का सपना होता है। मैं सोचता हूँ कि दुनिया में एक से एक कार लोगो के घरो में है , क्या ये कार कंपनी ने मेरे लिए नहीं बनाई है ? क्या ये नोट ,ये दौलत मेरे घर में आने से मना  कर देगी ? तभी मेरे दिल से चीख निकलती है कि नहीं ही ही ही ही ही, और अंदर एक आग सी जलने लगती है ,और  मैं लग जाता हूँ वो सब पाने के लिए, जो मैं पाना चाहता हूँ। मैं अक्सर कहता हूँ दोस्तों कि average   इंसान होना एक खतरनाक बीमारी है। जरा सोचो कि जितनी  भी हमारी जिंदगी में मुसीबते आती है ,उसके जिम्मेदार हालात नहीं हम खुद है क्योकि हमारे अंदर वो आग ही नहीं जली, जो इन्हे जलाकर खाख  कर दे। अगर आप जीवन से उबरना चाहते हो तो किसी भी अवसर को ना गवाये। अपनी इच्छाओ , अपनी चाहतो और अपने सपनो को चुनो। शांत होकर सहने कि बजाय , खड़े होकर इस दुनिया से लड़ जाओ और कह दो चिल्ला- चिल्ला कर कि मेरे लिए भी हर वो चीज़ बनी है जो इस दुनिया में मौजूद है।
मुझे दुष्यंत कुमार की कविता याद आती है –
हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए
आज यह दीवार  , पर्दो कि तरह हिलने लगी
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए
हर सड़क पर , हर गली में , हर नगर में , हर गाँव में
हाथ लहराते हुए , हर लाश चलनी चाहिए
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए
मेरे सीने में नहीं , तो तेरे सीने में ही सही
हो कही भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए
दोस्तों अपने अंदर कि आग को जलाते रहने के लिए और इसके तपन का एहसास करते रहने के लिए आपको Motivational Books पढ़ते रहना चाहिए  , Motivational CD और  DVD देखते और सुनते रहना चाहिए , और हो सके तोne  Motivational seminars और Training  में शामिल होना चाहिए ,तभी बनी रहती है ये आग ,ये बुझ ही नहीं सकती क्यों कि बुझने तो तुम दोगे नहीं  और ये आग आपको याद दिलाती रहेगी कि रुक क्यों गए, आगे बढ़ो क्योकि अभी मंजिल तुमने पाई नहीं है।