आपकी बेचने की चाहत,ना खरीदने की चाहत से ज्यादा होनी चाहिए

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एक बार बादशाह अकबर के दरबार में उनका साला पंहुचा और भरे दरबार में उनके  साले ने बादशाह अकबर से कहा की आप ने बीरबल को बहुत सर पर चड़ा  रखा है ,आपने  उसको ही क्यों राज-पाट का सारा जिम्मा सोप रखा है , राज दरबार में और भी ऐसे कई लोग मौजूद है जो बीरबल से ज्यादा होशियार और काबिल है , साला होने की वजह से बादशाह उसको कुछ  नहीं कह पाए परन्तु बादशाह ने दरबार में मौजूद  सभी लोगो से पूछा की बताओ किस किस को लगता है की वो बीरबल से जयादा समझदार है?…. किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। ।लेकिन बादशाह को लगा की साले को शांत करना भी  जरुरी है क्योकि वो साला है। ….  सारी  दुनिया एक तरफ और जोरू का भी एक तरफ ,…. बादशाह ने साले  से कहा की तुम्हे  क्या लगता है की मैं ऐसे ही बीरबल को होशियार,चालाक और काबिल समझता हूँ। …अगर तुम्हे लगता है की तुम होशियार और समझदार हो तो साबित करो, अगर साबित कर दिया तो कल से इस राज्य के मंत्री तुम। … साला – तो बताओ मुझे साबित करने  के लिए क्या करना होगा ?  बादशाह ने कहा ये कोयले का बोरा  है और इसको तुम्हे एक लाख सोने  की  मोहर  में बेचना है और जिसे बेचो उससे लिखवा कर भी लाना की कोयले के बदले एक लाख मोहरे  दी है ….. ये सुन, साला बोला  बादशाह ये तो कोयला है, ये भला इतने में कौन खरीदेगा वो भी सिर्फ एक बोरा!… बादशाह बोले तो मान लो तुम काबिल और होशियार नहीं हो। परन्तु उसको तो अपने आप को बीरबल से ज्यादा होशियार साबित करना था  ।… उसने  कोयले का बोरा लिया और बाज़ार में जाकर बेचने लगा।  …. काफी कोशिशो  के बाद , जब वह बेच नहीं पाया तो बादशाह के पास आकर बोला  की इस कोयले को एक लाख सोने की मोहर में अगर मैं नहीं बेच पाया हूँ तो दुनिया का कोई  भी इन्सान नहीं बेच सकता ,फिर चाहे वह बीरबल ही  क्यों न हो। …ये सुन बादशाह ने बीरबल को बुलाया और  कहा की ये कोयले का बोरा  है जो तुम्हे बेच कर हमे एक लाख सोने की मोहरे ला कर देना है…। बीरबल बोला की बादशाह ये बोरा तो बहुत कीमती है, इस कोयले के तो कई ज्यादा सोने की मोहर मिल जाएगी और आप सिर्फ एक लाख सोने की मोहर ही लाने की  मांग कर  रहे है। । बीरबल ने कोयले के बोरे  से एक टुकड़ा उठाया और कहा –  अगर आपको एक लाख मोहर ही  चाहिए तो ये एक टुकड़ा ही  काफी है…और वो उस टुकड़े को ले कर चला गया। …जब शाम को बीरबल दरबार में वापस पंहुचा तो उसके हाथ में एक लाख सोने की मोहरे और जिसे बेचा, उसका लिखा हुवा कागज था जिसमे लिखा था की मैंने इस कोयले के बदले एक लाख सोने की मोहर दी है ,बीरबल ने वो ख़त और मोहर बादशाह को दी ,….. बादशाह ने अपने साले से कहा की देखा मैंने बीरबल को क्यों मंत्री बनाया है। …इतना सुन साला वहा  से चला गया। …परन्तु बादशाह ये जानना चाहते थे की आखिर एक टुकड़े के बदले एक लाख सोने की मोहर कैसे मिली। …बादशाह ने बीरबल से पूछा की आखिर तुमने इसे बेचा कैसे ? बीरबल बोल – मैंने उस कोयले के टुकड़े को पिस कर पहले सुरमा बनाया और उस सुरमे को लेकर मैं अपने पडोसी राज्य के राजा के पास गया… राजा अपने सभी दरबारियों के साथ  दरबार में बेठे थे … उनसे मैंने उस सुरमे की खासियत बताई की ये सुरमा जो भी अपनी आखों में लगता है उसको अपनी सात पुस्ते दिखाई देने लगती है  …य़े सुनकर  राजा को यकीं नहीं हुवा  तो महाराज ने कहा की मुझे लगाओ मैं देखना चाहता हूँ की तुम सही कह रहे हो या नहीं।  तभी मैंने उनसे कहा की महाराज ये सुरमा बड़ा महंगा है इसको एक बार लगाने के ही एक लाख सोने की मोहर लगती है।  तो महाराज बोले की ठीक है अगर तुम्हारी बात सही है तो हम एक लाख मोहर देंगे। …और अगर गलत हुई तो फासी। … तभी मैंने उनसे कहा की ठीक है महाराज, पर इस सुरमे की एक खासियत है की इसको लगाने के बाद उसी को अपनी सात पुस्ते दिखेगी  जो की एक बाप का होगा , और अगर वो दो  बाप का है तो उसको नहीं दिखेगी।  बस  फिर क्या था वो तैयार हो गए और मैंने उनको सुरमा लगा दिया। …और पूछा  की महाराज, क्या आपको सात पुसते दिखाई दे  रही है?  फिर क्या था महाराज ने हां  ही  कहा। ….  पुरे  दरबार के सामने मना तो कर नहीं सकते थे। …. उन्होंने लिख कर भी दे दिया और मोहरे भी दे दी

सन्देश –  वाकई अगर कोई  बेचने पर आये तो कोयला भी लाखो में बेच सकता है , बस बेचने वाले में बेचने की कला होनी चाहिए मैं भी यही मानता  हूँ की हर चीज़ बिक सकती है बस  आपकी बेचने की चाहत , ना  खरीदने  की चाहत से ज्यादा  होनी चाहिए।