अपने विचार को पाले

hallucinogenic_thoughts

आप भी इस दुनिया की सारी खुशियाँ और दौलत प्राप्त कर सकते हो। या ये कहूं कि आप वित्तीय रूप से जो भी हासिल करना चाहते हो वह और उससे भी अधिक हासिल कर सकते हो तो भी मैं सही हूँ। मैं तो सिर्फ इतना जानता हूँ कि कम पैसे पास में रखने से अच्छा है कि अधिक पैसे पास में रखना। और इसे तेजी से हासिल करना धीरे धीरे जमा करने से बेहतर है क्योकि धन- दौलत ही हमारे जीवन में विकल्प बढ़ता है। यही नए प्रकार की आज़ादी दिलाता है और गरीबी की गुलामी का अंत करता है।
मैं नहीं समझता कि मेरी इन बातो से कोई असहमत होगा। परन्तु सभी के दिमाग में ये प्रश्न जरुर आ रहे होंगे कि ” हम इसे कैसे हासिल करे ?” ” खुशहाली का प्रारम्भ कहा से होता है ?” “इसकी सुरुआत कैसे खोजे ?” लेकिन दोस्तों हम सभी जानते है कि ये सब हमे हासिल करना है तो सुरुआत तो करना ही पड़ेगी, परन्तु कहा से ?
उत्तर सीधा है। वैभव एक विचार से प्रारम्भ होता है। सबसे पहले आप इस बात से आश्वस्त हो जाइए कि यह दुनिया में आप के लिए भी उपलब्ध है , इसे हासिल करने के लिए आप स्वयं के पीछे लग जाओ और जब यह जिस रूप में भी आता हो इसे स्वीकार करो और एक बार आप सुनिश्चित कर लो कि यहाँ से मुझे भरमार मिलेगा तो फिर अपने आपको उसमे झोक दो , अपने जीवन को उसमे फुँक दो।
दूसरी शर्त यह है कि आपके विचार सकारात्मक ही होने चाहिए। लेकिन सकारात्मक विचार है क्या ? आइये मैं बता हूँ , कुछ दिन पहले मैंने अमिरिका के कोलोरैडो कि सबसे बड़ी चाय बेचने वाली कंपनी के बारे में पड़ा था। जिसे हम “सैलेस्टियल सीज़निग्स टी ” के नाम से जानते है।आज यह एक बहुत ही बड़ी ब्रांड है लेकिन जब १९७१ में जब मो ने अपने इस बिज़नेस की सुरुआत कि तब वह और उसका मित्र मार्क बहुत ही उल्लास से भरे थे। वे जब भी पहाड़ो पर जड़ी बूटी तलाश करने जाते तब मो अपने मित्र मो से कहता था कि ” किसी दिन मैं इसे लिप्टन के टक्कर की चाय कंपनी बनाऊंगा ” तो मित्र कहता था हां , अवश्य ,अवश्य। लेकिन जब वह यही लोगो से कहता था तो लोग हसते थे।
खैर , उसने हेल्थ फ़ूड स्टोर्स में थोड़ी चाय बेचना प्रारम्भ की। फिर उसने इसे बढ़िया जमा लिया और थोड़े ही दिनों में अमेरिका के प्रत्येक स्टोर में यह चाय बेचने लगा और देखते ही देखते ये एक ब्रांड बन गई , आज यह अमेरिका कि सबसे बड़ी रोजगार देने वही कंपनी है।
मैं बस इतना ही जानना चाहता हूँ कि क्या मो ने पैसो से शुरुआत की? क्या उसने बड़ी फैक्ट्री या वेयर हाउस से प्रारम्भ किया ? क्या उसके पीछे कोई बड़ा कॉपोरेशन था ? क्या उसके बाप दादा बड़े व्यापारी थे ? इन सभी प्रश्नो का उत्तर है नहीं। उसने प्रगति कि राह पर मामूली रूप से,एक विचार और उस विचार विश्वास के साहस से शुरुआत की। ऐसे ही दुनिया में एक नहीं ,अनेक उदाहरण है – धीरूभाई अम्बानी , अमित बच्चन ,थॉमस अल्वा एडिसन , सचिन तेंदुलकर ,महेंद्र सिंह धोनी। लाखो लोग जिनका नाम इस दुनिया में इज्जत से लिया जाता है… ऐसे लोगो ने सिर्फ किया क्या ? एक विचार उनके मन में आया और उस विचार को पकड़ कर , उसी रास्ते पर साहस के साथ चले और बुलंदियों को छूने तक न रुके, न थके, न लोगो का ध्यान दिया कि कौन क्या कह रहा है बस अपने आपको ,अपने विचारो के साथ झोक दिया।
मेरी आपको यही राय देना चाहता हूँ कि आप एक विचार से शुरुआत करे ,उसका पोषण करे और किसी छोटे असहाय बच्चे कि तरह प्रोत्साहन दे। वह पनपेगा। आपके मन में और भी कई विचार कौंधगे और वो आपको रोकेंगे और चीख चीख कर कहेंगे कि आप ऐसा कैसे कर सकते हो फिर भी आपको रुकना नहीं है उसको करते चले जाना है तब तक, जब तक मंजिल न मिल जाए।