अंत का निर्धारण पहले ही करे।

एक बूढ़ा  इंसान सुनार के पास आया।  उसने सुनार से कहा मुझे तराजू दो, कुछ सोना तोलना है।  सुनार ने जवाब दिया दफा  हो जाओ, मेरे पास छलनी नहीं है। ।उस व्यक्ति ने कहा मजाक मत करो, मैं छलनी नहीं, तराजू मांग रहा हूँ।  सुनार ने जवाब दिया भाग जाओ मेरे पास झाड़ू नहीं है।
वह आदमी ग़ुस्से में आ गया।  उसने कहा मैं तराजू मांग रहा हूँ।  तुम छलनी , झाड़ू  क्या क्या बक रहे हो।  बेहरे होने का नाटक मत करो।  सुनार ने कहा न मैं बहरा हूँ ,न मैं कोई बक रहा हूँ, सच यह है की तुम बूढ़े हो, काप रहे हो , हाथ काप रहे है , शरीर सीधा नहीं है।  इसके अलावा तुम्हारे पास कोई बड़ा टुकड़ा नहीं है, बल्कि  सोने के कण है।  तुम तराजू में तोलने की कोशिश  करोगे  तो तुम्हारे कापते हुए हाथो से सोने के कण फिसल कर गिर जाएंगे।
फिर तुम कहोगे, सुनार मुझे एक झाड़ू दो ताकि मैं  धूल में सोने के कण ढूंढ निकालूँ।  जब तुम झाड़ू लगाओगे तो सोने के कण के साथ धूल भी आ जाएगी।  फिर तुम कहोगे सुनार भाई, छलनी दो।  शुरू से ही मैंने पूरा अंत देख लिया इस लिए यहाँ से निकलो कही और जाओ।
किसी  भी कार्य की शुरुआत करते ही उसका अंत देखने की कोशिश करनी चाहिए। ताकि मंजिल पर पहुँच कर पछतावा न हो।   आप सोच रहे होंगे  की  ऐसा कैसे संभव है की अंत पहले ही देखा जा सकता है।  हां ये संभव है क्योकि किसी भी कार्य का  अंत आपका लक्ष्य या आपकी मंजिल होता है। और  अगर आप उसे शुरुआत  में नहीं देख पा रहे है तो मुमकिन ही नहीं है की आप कभी वहा पहुँचोगे या कभी अपने लक्ष्य् को प्राप्त कर पाओगे। अगर आप कार्य का अंत , शुरुआत में  ही  देख  कर करते है…. इसका मतलब साफ़ है की आपके पास लक्ष्य है, जिसे आप पाना चाहते है। याद रखिए आपका लक्ष्य जितना बड़ा होगा आपकी सफलता भी उतनी ही बड़ी होगी। और अगर आपका लक्ष्य छोटा है तो आपकी सफलता भी छोटी होगी।  लक्ष्य बनाना कोई  थ्योरी नहीं है…… ये एक प्रैक्टिकल काम है। क्योकि अगर आप नहीं  जानते की आपको आपकी कार से कितने किलोमीटर जाना है, तो आप पेट्रोल कितना डलवाओगे। अगर वाकई आप जिंदगी में कुछ करना चाहते है तो आज ही अपने लक्ष्य को कागज पर लिख लो।  मैं जनता हूँ की आप में से अधिकतर लोग लक्ष्य को जब लिखने बैठेंगे तो शायद कई बार कागज को फाड़ दोगे और तब भी आप अपना लक्ष्य निर्धारित नहीं कर पाओगे की आप जाना कहा चाहते हो।  आप अपने ही विचारो और सपनो को शब्द नहीं दे पाओगे। तब जाकर आप को ये एहसास होगा की असल में आपके पास कोई लक्ष्य है ही नहीं , बस अपनी जिंदगी को यूँही बहलाए जा  रहे हो।